Nalanda University : बिहार की नालंदा धरती सदियों से ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध रही है. प्राचीन समय में यह क्षेत्र न केवल भारतीय बल्कि एशियाई विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने की थी और इसे दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है. यहाँ हजारों विद्यार्थी और सैकड़ों आचार्य एक साथ रहते और पढ़ते थे.
कैसा है आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय ?
नालंदा विश्वविद्यालय ने केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित रहा बल्कि यहाँ गणित, खगोलशास्त्र, राजनीति, तर्कशास्त्र, दर्शन, आयुर्वेद और चिकित्सा जैसे विषय भी पढ़ाए जाते थे. विश्वविद्यालय का विशाल पुस्तकालय, धर्मगंज, तीन प्रमुख खंडों रत्नसागर, रत्नरंजक और रत्नदधि में विभाजित था. जहां लाखों पांडुलिपियां संग्रहित थीं. जो दुर्भाग्यवश विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा जलाए जाने के बाद भी कई महीनों तक आग लगी रही. इस विनाश ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया से ज्ञान का एक अमूल्य स्त्रोत छीन लिया.
सदियों बाद भारत सरकार ने इस धरोहर को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया. 2010 में राजगीर के पास आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई. 2014 में शिक्षा प्रारंभ हुई,जिसमें पहले 14 छात्र और 15 देशों के विद्यार्थी शामिल हुए. 2016 में स्थाई कैंपस का निर्माण शुरू हुआ और 455 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन कैंपस तैयार किया गया.
आधुनिक शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय विस्तार
2017–18 में विश्वविद्यालय ने नए पाठ्यक्रम और विभाग खोले गए, जिनमें बुद्धिस्ट स्टडीज, कंपैरेटिव रिलिजन, फिलॉसफी और इंटरनेशनल रिलेशंस शामिल हैं. 2021 में कोविड-19 महामारी के बाद विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त हुआ. 19 जून 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए कैंपस का उद्घाटन किया गया, जिसमें 17 देशों के राजदूत उपस्थित थे. वर्तमान में नालंदा विश्वविद्यालय ने 2024–25 में लगभग 20 अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौते किए. प्रमुख संस्थानों में Peking University, University of Ostrava, Dongguk University, Deakin University, Otani University, Kanazawa University, The City University of New York और Chulalongkorn University शामिल हैं. इसके अतिरिक्त ICWA, IIPHG, ASI, ICCR, ISEAS, IIAS और CSIR जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इसके सहयोगी बने हैं.
बदलते समय के साथ निखर रही शिक्षा और शोध
समय के साथ नालंदा विश्वविद्यालय ने न केवल पारंपरिक शिक्षा को अपनाया बल्कि आधुनिक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को भी बढ़ावा दिया. आज यह विश्वविद्यालय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान करने और वैश्विक नेटवर्क बनाने का अवसर प्रदान करता है. नालंदा विश्वविद्यालय सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और संस्कृति का प्रतीक है. प्राचीन काल में जब यह एशिया के विद्वानों का केंद्र था, आज यह वैश्विक स्तर पर शिक्षा और अनुसंधान का प्रतीक बन चुका है. नालंदा न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत की गौरवशाली शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है.