खानपान और पहनावे से बदल रही तस्वीर…बिहार के इन उत्पादों के मिला है GI टैग

Bihar food GI tag : बिहार को लेकर कई सारी बातें जो कही जाती है उसमें उसकी बदहाली के चर्चे खूब होते हैं.लेकिन क्या आप जानते हैं उत्तर भारत का यह राज्य अपनी परंपरा, हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को जरिए देश दुनिया में अपनी पहचान बना रखा है,जिससे न केवल राज्य की अलग पहचान बनी है , बल्कि किसानों कलाकारों और शिल्पकारों की आमदनी भी बढ़ रही हैं ।

स्वाद और खुशबू से भरा बिहार

बिहार सिर्फ अपनी मिट्टी की खुशबू के लिए नहीं बल्कि स्वाद और जायको के लिए भी जाना जाता है , जहां  मिथिला का मखना अब सुपर फूड के नाम से दुनिया भर में पहचाना जाने लगा है , मुजफ्फरपुर की शाही लीची अपने रस और मिठास से हर किसी का दिल जीत रही है वही भागलपुर का जर्दालू आम अपनी सुगंध और स्वाद के कारण दुनियाभर में जाना जा रहा है.

चावल की किस्म में कतरनी चावल और मार्चा चावल अपनी सुगंध और स्वाद दोनों के कारण खास पहचान बनाने लगा है इसके साथ ही गया-नवादा का मगही पान अपनी ताजी और अनोखी महक से हर महफिल की शान बन चुका है और मिठास की बात हो तो नालंदा का सिलाव का खाजा कुरकुरे स्वाद के साथ बिहार की परंपरा और मेहमान नवाजी का एहसास कराता है , सचमुच बिहार के यह उत्पाद न सिर्फ स्वाद और खुशबू से भरपूर है बल्कि अपने साथ इतिहास परंपरा और संस्कृति की गहरी छाप भी लिए घूम रहे हैं ।

परंपरा से व्यापार तक की यात्रा

बिहार की सदियों पुरानी लोक कलाएं जो कभी सिर्फ गांव गली और स्थानीय मेले तक समिति आज GI टैग के सहारे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास जगह बना रही हैं, यहां टैग में सिर्फ असलियत की गारंटी है बल्कि इन उत्पादों को नहीं पहचान और कारीगरों को नहीं उम्मीदें भी दे रही है ।

मंजूषा कला (भोजपुर-भागलपुर) अपनी पौराणिक कथाओं और लोक कथाओं को जीवित रंगों और आकृतियों से इतिहास और आस्था की झलक दिखा रहा है , वही मधुबनी पेंटिंग मिथिला की सांस्कृतिक  धरोहर को संजोकर रखा है ।  भागलपुरी सिल्क (तसर रेशम) अपनी मुलायम बनावट और राजसी चमक के कारण शाही परिधानों की पहचान बन चुका है , इसके साथ ही सिक्की घास शिल्प साधारण घास से गढ़ी गई कलाकृतियां और खिलौने के  जरिए ग्रामीण जगह की मिसाल पेश कर रहैं हैं , खटवा (एप्लिक वर्क) कपड़े पर सुई-धागे से उकेरी जाने वाली अनोखी कारीगरी भी कर रहैं , जो पारंपरिक डिजाइन से  आधुनिक परिधानों में नई जान देती है। वहीं, सुजनी कढ़ाई महीन धागों से की गई कलात्मक सिलाई है, जिसमें सामाजिक जीवन, लोकगाथाएं और भावनाओं की गहराई बारीकी से नजर आती है।

महिलाएं बनी बदलाव की ताकत

इन कलाओं और उत्पादों के पीछे सबसे बड़ी ताकत बिहार की महिलाएं हैं। मधुबनी पेंटिंग और सुजनी कढ़ाई करने वाली महिलाएं अब अपनी कला को ऑनलाइन बेचकर लाखों रुपये कमा रही हैं। यही नहीं, GI टैग मिलने के बाद उन्हें अपने काम का असली मूल्य मिलना शुरू हुआ है।

गाँव की गलियों से दुनिया के बाजारों तक

GI टैग ने बिहार के उत्पादों को लोकल से ग्लोबल तक पहुंचाया है। अब ये सिर्फ गांव-शहर तक सीमित नहीं, बल्कि पेरिस, टोक्यो और न्यूयॉर्क जैसे शहरों के बाजारों में बिक रहे हैं। इससे न केवल बिहार की ब्रांड वैल्यू बढ़ी है,बल्कि स्थानीय कारीगरों और किसानों की आजीविका को भी मजबूती मिली है।

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