पंजाब में भारी बारिश से नदियों में उफान, बाढ़ के कारण 1,300 से ज्यादा गांव प्रभावित

Punjab floods : पंजाब राज्य पिछले एक महीने से भीषण बाढ़ संकट से जूझ रहा है । अगस्त 2025 में मानसून की भारी बारिश और हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से बहकर आई अतिरिक्त पानी की वजह से पंजाब में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है । यह बाढ़ 1988 के बाद की सबसे बड़ी आपदा मानी जा रही है, जिसमें सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं । इसके अलावा, भाखड़ा, पोंग और रणजीत सागर डैमों से पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है ।

1,300 से ज्यादा गांव प्रभावित

पंजाब में बाढ़ की स्थिति वाकई बहुत ही दुखद और गंभीर है. इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं पूरे समुदाय को प्रभावित करती हैं, और यहां तक कि कई लोगों की जान भी जा चुकी है. राज्य सरकार और राहत कार्यों में जुटी एजेंसियां, जैसे NDRF और सेना, मुश्किल परिस्थितियों में लोगों की मदद कर रही हैं, लेकिन असल संकट तब आएगा जब बाढ़ का पानी घटेगा और फिर से पुनर्निर्माण का काम शुरू होगा.

खासतौर पर होशियारपुर जैसी जगहों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, जहां अब तक नुकसान और तबाही की ज्यादा रिपोर्ट्स आई हैं. साथ ही, 1,300 से ज्यादा गांव और बड़ी कृषि भूमि का नुकसान भी बहुत गंभीर है, क्योंकि यह न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे राज्य के आर्थिक ढांचे के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.

प्रभावित क्षेत्रों और नुकसान

पंजाब के 22 में से सभी जिले इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें खासकर गुरदासपुर, अमृतसर, तरन तारन, फिरोजपुर, पठानकोट, फाजिल्का, कपूरथला और होशियारपुर शामिल हैं. लगभग 1,018 से 1,312 गांव बाढ़ में डूब चुके हैं. करीब 1.46 लाख से 2.56 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 11,300 से 1.25 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. 3 लाख एकड़ (96,000 हेक्टेयर) फसलें नष्ट हो चुकी हैं, जिनमें प्रमुख फसलें चावल, गन्ना, सब्जियां और कपास शामिल हैं. फाजिल्का जिले में अकेले 41,099 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है.मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बरनाला, फिरोजपुर और कपूरथला जिलों में 1-1 मौतें शामिल हैं. एक सिंचाई विभाग का कर्मचारी रावी नदी में बह गया. घर, सड़कें, बिजली, पशुधन और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुए हैं. जालंधर और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं, जबकि किन्नौर में चट्टान गिरने से नेशनल हाईवे-5 भी बंद हो गया.

जलवायु प्रभाव और रिकॉर्ड बारिश

पिछले महीने पंजाब को सामान्य से 74% ज्यादा बारिश (253.7 मिमी) मिली, जो पिछले 25 सालों का सबसे अधिक रिकॉर्ड है. राज्य में भारी बारिश के साथ-साथ नदियों का उफान और डैमों से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो गई है. पंजाब की 1988 की बाढ़ को हजार साल में एक बार की घटना माना गया था, जिसमें 75% फसलें नष्ट हो गई थीं और 600 से 1,500 लोगों की जान चली गई थी. वर्तमान बाढ़ भी वही तबाही मचा रही है, और एक बार फिर पंजाब को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है.

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