क्यों लगाया जाता है नाक तक नारंगी सिन्दूर ? बिहार और झारखंड की पुरानी परंपरा

Bihar: बिहार और झारखंड की शादियों की अपनी अलग ही  पहचान है  यहां की शादियों में एक रिवाज काफी खास है , यहां  नाक तक लगाए जाने वाली नारंगी  सिंदूर जिसे यहां के लोग भखरा सिंदूर भी कहते हैं । यह परंपरा देश भर में बिहार और झारखंड को अलग पहचान देती है । दुल्हन की नाक से मांग तक भरा सिंदूर न केवल दुल्हन की खूबसूरती बढ़ाता है बल्कि यहां की संस्कृति को भी दर्शाता है ।

भखरा सिन्दूर का बिहार झारखंड में चलन

नारंगी सिंदूर लगाने की परंपरा बहुत प्राचीन है जिसकी बात वैदिक काल  से मिलती है विशेष कर देवी पार्वती को सिंदूर की देवी माना जाता है मान्यता है कि नानी पहली बार इसे अपने वैवाहिक जीवन की निशानी बनाई थी धीरे-धीरे हम परंपरा पूरे उत्तर भारत में पहले लेकिन बिहार में झारखंड में को खास महत्व मिला पुराने समय में सिंदूर हल्दी चूना और पारे से तैयार किया जाता था हल्दी और पारे  के मिश्रण से नारंगी लाल रंग निकलता था , यह मिश्रण न केवल शुभ माना जाता था बल्कि  इसे औषधि गुणों वाला भी माना जाता था तभी से बिहार झारखंड की शादियों में लगाने की प्रथा शुरू हुई ।

नाक से क्यों लगती है महिलाएं सिंदूर?

हालांकि सिंदूर मांग पर लगाया जाता है लेकिन बिहार और  झारखंड में त्योहारों या पहली बार जब दुल्हन के मांग में सिंदूर भरा जाता है तब लगाया जाता है । नाक से मांग तक सिंदूर का अर्थ है की पत्नी पूरी तरह से पति और परिवार को समर्पित हो गई है नाक से सिंदूर लगाने से घर में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है , कहा जाता है कि जितना लंबा सिंदूर लगाया जाएगा उतना ही पति की उम्र लंबी होगी और घर परिवार में सुख समृद्धि बढ़ेगी यह न सिर्फ दुल्हन की नहीं पहचान और वैवाहिक जीवन का प्रतीक है , बल्कि बिहार झारखंड की शादियों की सबसे अनोखी बात है ।

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