SIR in Bihar : मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा की तैयारियों के बीच केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर बड़ी पहल की है. इस कड़ी में 10 सितंबर को राजधानी दिल्ली में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEOs) की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है. यह बैठक द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में आयोजित होगी.
बिहार के अनुभव पर आधारित राष्ट्रीय रणनीति
फिलहाल बिहार में SIR की प्रक्रिया चल रही है. इस बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी कि बिहार से मिले अनुभव के आधार पर पूरे देश में यह प्रक्रिया लागू करने पर विचार किया जा रहा है. अब संभावना है कि बिहार मॉडल को बाकी राज्यों में भी अपनाया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक, एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस की शुरुआत मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के संबोधन से होगी. इसके बाद डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संतोष कुमार लगभग आधे घंटे का विस्तृत प्रेजेंटेशन देंगे, जिसमें SIR की नीतियों और दिशा-निर्देशों पर रोशनी डाली जाएगी.
बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी भी इस बैठक में प्रस्तुति देंगे और राज्य में अपनाई गई प्रक्रिया और शुरुआती अनुभव साझा करेंगे. इसके बाद देशभर से आए मुख्य चुनाव अधिकारी अपने-अपने राज्यों की तैयारियों,चुनौतियों और व्यावहारिक पहलुओं पर लगभग साढ़े चार घंटे तक विचार-विमर्श करेंगे. बैठक के अंत में लगभग 45 मिनट का प्रश्नोत्तर सत्र भी रखा गया है,ताकि राज्यों की चिंताओं और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकाला जा सके.
राष्ट्रीय स्तर पर SIR लागू करने पर चर्चा
आयोग इस बात पर विचार कर रहा है कि बिहार के बाद शेष राज्यों में भी एक साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण शुरू किया जाए. पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में आयोग चाहता है कि मतदाता सूची का अद्यतन कार्य समय रहते पूरा कर लिया जाए. बैठक में एक और अहम मुद्दा दस्तावेजों की वैधता से जुड़ा रहेगा. बिहार में वर्तमान में 11 दस्तावेजों को मान्य माना गया है, जिनमें आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता सूची शामिल नहीं है. आयोग चाहता है कि बाकी राज्यों के अधिकारी अपने सुझाव दें कि और किन दस्तावेजों को वैध दस्तावेजों की सूची में शामिल किया जा सकता है.
क्यों अहम है यह बैठक?
विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण न केवल चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे डुप्लीकेट नामों को हटाने और नए योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करने में भी मदद मिलेगी. साथ ही यह प्रक्रिया अगले वर्ष संभावित लोकसभा चुनावों के लिए आधार तैयार करने में निर्णायक साबित हो सकती है.