Madhya pradesh: मंगलवार 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो समूह के जावेरी मंदिर में भगवान विष्णू की 7 फूट लंबी खंडित मूर्ति की याचिका पर सुनवाई की. मांग थी कि भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली की जाए. मामला राकेश दलाल बनाम भारत संघ से दर्ज हुआ था.
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवाई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह के बेंच ने कहा कि यह मुद्दा अदालत के आधिकारिक क्षेत्र में नहीं बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(ASI) के अंदर आता है.
सुनवाई के दौरान CJI GAVAI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो तो उनसे जाकर कहो कि खुद कुछ करे.
याचिका करता राकेश दलाल ने दलील में यह कहा कि यह प्रतिमा मुगल आक्रमणों के दौरान खंडित हुई थी और आजादी को 77 साल बाद भी उपेक्षा की वजह से टूटी हुई पड़ी है. उनका कहना था कि सरकार का बहाली से इनकार करना भक्तों के मौलिक पूजा अधिकारों का उल्लंघन है.
याचिका में दलाल यह भी कहा कि यह मंदिर चंद्रवंशी राजाओं द्वारा निर्मित है इसका इतिहास में उल्लेख किया गया है और आरोप लगाया कि औपनिवेशिक उपेक्षा और स्वतंत्रता के बाद की निष्क्रियता ने प्रतिम को इस दशा पहुंचा दिया है.