Bihar : बिहार विधानसभा चुनवा आते ही राजनतिक का माहौल गरमा जाता है . हर पार्टी अपने उम्मीदवार चुनने में जुटे जाती है . और कई स्वतंत्र प्रत्याशी भी मैदान में उतरने की तैयारी करते है . आम जनता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है की आखिर चुनवा लड़ने के लिए कितने पैसे चाहिए ? क्या यह केवल बड़े नेताओं और कोरड़पतियो का खेल है या फिर कोई आम इंसान भी इसमें किस्मत आजमा सकता है .
नामांकन शुल्क कितना है?
भारत निर्वाचन आयोग ECI के नियमो के अनुसार, विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने के लिए 10,000 रुपये की राशि बतौर सिक्योरिटी डिपाजिट जमा करनी होती है . वही अगर उम्मीदवार अनुसूची जाती SC या अनुसूची जनजाति ST वर्ग से आते है . तो उन्हें केवल 5000 रुपये जमा करने होते है . यह राशि नामांकन पत्र दाखिल करने के समय निर्वाचन अधिकारी को दी जाती ही .
सिक्योरिटी डिपॉजिट की शर्त
यह सिक्योरिटी डिपाजिट हर किसी को वापस नहीं मिलती . इसके लिए एक शर्त है – उमीदवार को चुनाव में कुल वैध वोटो का कम से कम १/६ हिस्सा यानि लगभग 16 66 % वोट हासिल करना जरुरी है , अगर कोई उम्मीदवार यह न्यूतम वोट नहीं ला पाता, तो उसकी जमा की गई राशि जब्त हो जाती है . यही वजह है की कई स्वतंत्र उम्मीदवार को चुनाव परिणाम आने के बाद यह रकम गवानी पड़ती है .
खर्च की सीमा क्या है?
नामांकन शुलक तो मामूली है , लेकिन असली चुनौती चुनाव प्रचार के खर्च की होती है . निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनवा में उम्मीदवारो के लिए अधिकतम खर्च की सीमा तय की हुई है . बिहार जैसे राज्य में यह सीमा 28 लाख रुपए के आसपास है . इसका मतलब यह है की कोई भी प्रत्याशी नामांकन से लेकर परिणाम तक के पुरे चुनाव अभियान में तय सीमा से ज्यादा खर्च नहीं कर सकता
चुनाव लड़ने के असली खर्चे
चुनाव प्रचार में पोस्टर – बैनर , डिजिटल कैपियन , सोशल मीडिया , गाड़ियों का इस्तेमाल , सभा और रैलिया आयोजित करने पर बड़ा खर्च आता है . राजनीतिक दलों के उम्मेदवारो को पार्टी का सहयोग मिलता है . लेकिन स्वतंत्र उम्मेदवारों को सारा खर्च खुद उठाना पड़ता है . यही वजह है की केवल नामांकन भरना आसान है , लेकिन चुनाव प्रचार करना बेहद मुश्किल और महंगा साबित होता है .
क्या आम आदमी लड़ सकता है चुनाव?
तकनीकी रूप से देखा जाएंतोह किसी भी व्यक्ति , जिसके पास 10000 रुपए है और जो चुनाव लड़ने के लिए कानूनी रूप से पात्र है . बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ सकता है . यह लोकतंत्र की खुभसूरती है की हर नागरिक को चुनाव मैदान में उतरने का अधिकार है . हालंकि , जनता का समर्थन और चुनाव प्रचार की ताकत के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होता .
क्या आम आदमी लड़ सकता है चुनाव?
तकनीकी रूप से देखा जाए तो कोई भी व्यक्ति , जिसके पास 10000 रुपए है और जो चुनाव लड़ने के लिए कानूनी रूप से पात्र है बिहार विधानसभा का चङाव लड़ सकता है . यह लोकतंत्र की खुभसूरतरी है की हर नागरिक को चुनाव मैदान में उतरने का अधिकार है . हालाँकि जनता का समर्थन और चुनाव प्रचार की ताकत के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होता.
बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन शुलक ज्यादा नहीं है . केवल 10000 रुपया देकर कोई भी आम व्यक्ति चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है . लेकिन चुनावी राजनीतिक केवल नामांकन पर खत्म नहीं होती . असली चुनौती जितना अब भी बड़े हौसले , मेहनत और संसाधनों का खेल बना हुआ है *