जहां हर चुनाव एक नया सरप्राइज ले कर आता हैं, वही राजनीतिक झूला कभी थमता नहीं…

Navada Vidhashabha seat: बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों शोरों से चल रही है, तो वहीं बिहार के दक्षिणी हिस्से में खूरी नदी के किनारे बसा नवादा एक ऐसा शहर है. जिसका नाम भले ही नौ–आबाद (नया नगर) से आया हो लेकिन, इसकी राजनीतिक पहचान लगातार बदलते रंगों में ही रही है. यह वह विधानसभा क्षेत्र है, जहां मतदाता किसी एक पार्टी पर भरोसा करने को कभी तैयार ही नहीं होते और हर चुनाव में एक नई कहानी लगते हैं.

महान मगध साम्राज्य और नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत के पास स्थित होने के बावजूद नवादा का अतीत हमेशा धुंधला सा रहा है. 1857 के विद्रोह में जब इस कस्बे को लूटपाट करने वाले गिरोहों ने तहस नहस कर दिया, तो कुछ समझदार स्थानीय अधिकारियों ने सरकारी दस्तावेजों को एक पहाड़ी गुफा में छुपा दिया था. यह वही दस्तावेज है जो 1857 से पहले के नवादा की आखिरी निशानी मानी जाती है. आज यह शहर भ्रष्टाचार और कानून हीनता जैसी अव्यवस्था को गर्व की तरह धारण किए घूम रही है. इसी कारण बिहार के अन्य हिस्सों में दिखने वाला विकास नवादा को छू तक नहीं पा रहा है.

1951 से में स्थापित नवादा विधानसभा क्षेत्र अब तक 19 चुनाव देख चुका है, और हर बार अस्थिरता ही इसकी पहचान बनी आई है. आंकड़े बताते हैं कि मतदाता लगातार पार्टियों के बीच झूलते रहे हैं. जहां कांग्रेस छह बार विजई हुई है, भाजपा और जनसंख्या तीन बार, निर्दलीय पार्टी तीन बार, राजद तीन बार, सीपीआई कदो बार, और जेडीयू दो बार, पिछले चार चुनाव में यह सीट एक राजनीतिक झूले में बदल गई है पहले जदयू फिर आरजेडी फिर जेडीयू और फिर राजद की जीत हुई.

2015 के विधानसभा चुनाव में राजद के राजबल्लभ प्रसाद ने शानदार जीत दर्ज की थी उन्होंने 88,235 वोट हासिल कर राष्ट्रीय लोग संविदा पार्टी के इंद्रदेव प्रसाद को 16,726 वोटो के अंतर से हराया था. यह जीत महागठबंधन की लहर का हिस्सा थी. जब नीतीश कुमार की जेडीयू लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस ने मिलकर बिहार में एनडीए को करारी शिकस्त दी थी. वही 2020 का चुनाव नवादा की अप्रत्याशित राजनीति का एक और नया उदाहरण बन गया था. इस बार राजद की विभा देवी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 72,435 वोट हासिल किया और निर्दलीय उम्मीदवार श्रवण कुमार को 26310 वोटो के भारी अंतर से हराया था. 2020 मैं सबसे बड़ा सरप्राइज यह था कि जेडीयू तीसरे स्थान पर खिसक गई थी, एक निर्दलीय उम्मीदवार से भी पीछे यह एनडीए सहयोगी के लिए शर्मनाक हार थी.

अगर पिछले चुनाव का पैटर्न देखा जाए तो (JDU –> RJD –> JDU –> RJD) ऐसा रहा तो , 2025 का चुनाव JDU के पक्ष में जाना चाहिए.

नवादा एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां कोई भी जीत पक्की नहीं है या ना तो पारंपरिक जातीय समीकरण काम करती है, और ना ही राजनीतिक पैटर्न मतदाता अपने निर्णय लेने में आजाद है. कभी नकद लालच से प्रभावित तो कभी अल्पकालिक निष्ठा से.

2025 का चुनाव किसी भी दिशा में जा सकता है एक तरफ जीत कांटे की टक्कर या कोई अप्रत्याशित मोड़ लेकिन, एक बात तय है नवादा में हमेशा अव्यवस्था ही अंतिम फैसला लेती आई है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *