Warsaliganj vidhanshabha seat: बिहार के नवादा जिले में स्थित वारसलीगंज विधानसभा सीट का इतिहास जितना रोचक है, उसकी राजनीति उतनी ही दिलचस्प है. नवादा की इस सीट पर सिर्फ जीत हार का खेल नहीं बल्कि एक अनोखी कहानी छुपी हुई है. अक्सर राजनीति में जीत हार का फैसला हजारों वोटो से होता है, लेकिन वारसलीगंज विधानसभा सीट पर 2020 में जो हुआ वह चुनावी इतिहास में दर्ज होने लायक है. भाजपा की अरुणा देवी और कांग्रेस के सतीश कुमार के बीच जंग तो थी ही लेकिन असली संख्या बटोरी एक निर्दलीय महिला प्रत्याशी ने आरती सिन्हा.
इस जगह का नाम वारिस अली खान के नाम पर पड़ा जो माई खानदान से थे. वह खानदान मुस्लिम राजपूत का शक्तिशाली वंश हुआ करता था. जिसने कभी नरहट–समई इलाके पर राज किया था. आज यह पूरा क्षेत्र नवादा जिले के हिस्से में आता है, यह क्षेत्र ऐतिहासिक धरोहर का खजाना है हालांकि, इसे कभी सही तरीके से दस्तावेजकृत नहीं किया गया है.
1991 में जब वारसलीगंज विधानसभा सीट बनी थी, तब से लेकर अब तक यहां 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. हर दौर में इस सीट ने नई राजनीति कहानी देखी है. इस सीट पर कांग्रेस ने 7 बार झंडे गाड़े हैं. हालांकि आखिरी जीत 1995 में मिली थी. उसके बाद से कांग्रेस यहां संघर्ष कर रही है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी यहां तीन बार अपना परचम लहरा दिया है, निर्दलीय का दबदबक दो बार जीता जो दिखता है कि जनता, पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार को देखते हैं. जनता पार्टी और जेडीयू ने एक-एक बार जीत हासिल किया हैं. भाजपा का उभार 2015 से इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई हुई है दो जीत ने भाजपा को यहां का प्रमुख दावेदार बना के रखा है.
एक जमाना था जब वारसलीगंज चीनी मिलों और कपड़े के मिलो की वजह से पूरे इलाके में मशहूर था, मगध क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण ब्लॉक यहां की धरती इतनी उपजाऊ थी, की खेती यहां की पहचान बन गई थी. यहां रोजगार के अवसर थे, व्यापार था, चहल-पहल थी, लेकिन 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में (जिसे जंगल राज भी कहा जाता था) उसे समय ने इस जगह की स्थिति बदल दी एक के बाद एक उद्योग बंद होते गए और वारसलीगंज फिर से खेती पर निर्भर हो गया, अब एक बार फिर उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है अडानी ग्रुप ने यहां 1,400 करोड़ रुपए की विशाल सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट लगाने का ऐलान किया है. इससे न सिर्फ सीधे रोजगार मिलेगा बल्कि, सहायक उद्योग भी आएंगे स्थानीय युवाओं को नौकरी मिलेगी.
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने वारसलीगंज सहित नवादा की 6 में से 5 विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई थी. वारसलीगंज में भाजपा ने 14,631 वोटो से बड़ा हासिल की, जो 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए अच्छी खबर हैं.
आने वाले 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी, जेडीयू, लोजपा और राजद–कांग्रेस गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. अडानी की नई परियोजना भाजपा की मौजूदा सत्ता और अरुणा देवी की मजबूत जमीनी पकड़ को देखते हुए. भाजपा के लिए सीट बरकरार रखना आसान नजर आ रहा है. लेकिन 2020 में आरती सिन्हा के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया जनता निर्दलीय उम्मीदवारों को भी गंभीरता से लेती है. यह चुनाव केवल पार्टी की लड़ाई नहीं बल्कि व्यक्तित्व और विकास के मुद्दों की भी लड़ाई है अब देखना यह होगा कि भाजपा हैट्रिक बनती है या फिर यहां के नतीजे बदलते हैं.