2020 में हार के अंतर को कम कर पाएगी महागठबंधन या प्रशांत किशोर खोलेंगे जीत का खाता…

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर है इस बार चुनावी समीकरण पहले काफी जटिल हो गए हैं. एनडीए महागठबंधन के साथ-साथ प्रशांत किशोर की जन स्वराज पार्टी के मैदान में उतरने से यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. लेकिन 2020 के चुनाव का परिणाम आज भी कई सबक देता है, खासकर जब बात हो मौजूद मंत्रियों की जीत हार की क्या आप जानते हैं, कि बिहार सरकार में एक ऐसे मंत्री हैं. जो केवल 12 वोटो के अंतर से जीते थे? वहीं कुछ मंत्रियों ने 40000 से अधिक वोटो के बड़े अंतर से शानदार जीत दर्ज की थी.

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, तो वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने कांग्रेस और वामदलों के साथ महागठबंधन बनाया था. नतीजा अत्यंत रोमांचक और कड़े मुकाबले में आए. कुल 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए ने 125 सीट जीतकर बहुमत हासिल की थी, वही महागठबंधन को 110 सीट मिली थी. अन्य छोटे दलों और गठबंधनों ने 8 सीट हासिल की थी. यह बिहार की राजनीति में अब तक का सबसे करीबी मुकाबला रहा था.

 

नीतीश कुमार की वर्तमान सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री हैं. 2020 के चुनाव में इन मंत्रियों का प्रदर्शन काफी अलग-लग रहा, कुछ मंत्रियों ने बड़े अंतर से आसान जीत दर्ज की जबकि, कुछ की जीत मुश्किल से हुई सब कुछ मंत्रियों की जीत मात्र कुछ 100 वोटो के अंतर से, वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने आराम से बड़े मार्जिन से जीत दर्ज की खासकर बीजेपी के कुछ उम्मीदवारों ने अपनी सीटों पर दबदबा कायम रखा.

 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2020 में राज्यसभा सांसद थे, इसलिए उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था. हालांकि, उनकी पार्टी जदयू को केवल 43 सीट मिली थी जो 2015 की तुलना में काफी कम थी. जब बात की जाए कम वोटो से जीत हासिल करने की तो जेडीयू के श्रवण कुमार की जीत सबसे रोमांचक परिणाम में से एक थी. हिलसा विधानसभा सीट से जदयू के श्रवण कुमार ने राजद के प्रतिद्वंदी को केवल 12 वोटो के अंतर से हराया था. यह बिहार चुनाव 2020 में किसी भी मंत्री की सबसे कम जीत का मार्जिन था. जब एक मंत्री सिर्फ 12 वोटो से जीता है, तो दूसरा 40000 से अधिक वोटो से तो यह साबित करता है कि चुनाव में हर वोट का मूल्य है.

2025 के चुनाव में प्रशांत किशोर की जन स्वराज पार्टी के मैदान में उतरने से समीकरण और कठिन हो गए हैं. यह त्रिकोणीय मुकाबला वोटो के बंटवारे को प्रभावित कर सकता है, और जीत के मार्जिन को और भी काम कर सकता है. 2020 का बिहार चुनाव यह साबित करता है कि लोकतंत्र में हर वोट की कीमत होती है, जब एक मंत्री 12 वोटो से जीता है तो दूसरा 40000 वोटो से तो यह दर्शाता है कि चुनावी राजनीति कितनी अप्रत्याशित हो सकती है.

2025 का चुनाव इससे भी अधिक रोमांचक होने की संभावना रखता है. जहां हर मतदाता की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी, अब देखना दिलचस्प होगा की 2025 के चुनाव में किसका पलड़ा भारी होगा.

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