Rajgir vidhanshabha seat: बिहार विधानसभा चुनाव के दिन अब ज्यादा दूर नहीं है. बिहार की राजनीति में राजगीर विधानसभा सीट एक अनोखा उदाहरण रखती है. जहां किसी भी राजनीतिक दल को लगातार दो बार जीत हासिल नहीं हो पाई, नवादा जिले में स्थिति यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट राजनीतिक अस्थिरता और बदलते जनादेश का प्रतीक बन चुकी है.
राजगीर जिसे प्राचीन काल में राजगरिया कहा जाता था, जो पांच पहाड़ियों के बीच बस एक विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता के गौरवशील अतीत का जीवंत प्रमाण है. नालंदा जिले के इस अनुमंडल में जहां एक और महाभारत काल के जरासंध का अखाड़ा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक भारतीय लोकतंत्र की रोमांचक राजनीति.
महाभारत में वर्णित जरासंध का यह साम्राज्य अपनी सैन्य ताकत के लिए प्रसिद्ध था. भगवान श्री कृष्ण पांडवों के साथ यहां आए और जरासंध को कुश्ती से पराजित कर दिया, इस जगह के लोगो को अत्याचारी राजा से मुक्ति दिलाए. जहां आज भी जरासंध अखाड़ा ऐतिहासिक स्थल की याद दिलाता है. राजगीर हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है. गौतम बुद्ध और जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने यहां लंबा समय बिताया और महत्वपूर्ण उद्देश्य दिया.
राजगीर में 1957 में विधानसभा क्षेत्र के रूप में क्षेत्र में अस्तित्व में आया, और इस अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किया गया, नालंदा लोकसभा क्षेत्र के साथ विधानसभा क्षेत्र में से एक है. राजगीर सीट एक अनोखा उदाहरण है जो भारतीय जनता पार्टी के बारे में यहां धरना तोड़ती है कि यह केवल स्वर्ण की पार्टी है. इस SC आरक्षित सीट पर भाजपा ने 9 बार जीत दर्ज की है. जिसमें दो बार भारतीय जन संघ के रूप में भी शामिल है, यह आंकड़ा किसी भी अन्य पार्टी से कई अधिक है.
अगर पिछले दो विधानसभा चुनाव के नतीजे के बारे में बात करें तो 2015 के विधानसभा चुनाव में रंगीन सीट के लिए एक अलग ही तस्वीर पेश की गई थी. इस चुनाव में राजद के प्रभाव में महागठबंधन में प्रदेश प्रदर्शित किया हालांकि जदयू के रवि ज्योति कुमार ने बीजेपी के सत्यदेव नारायण आर्य को 5,390 वोटो के मार्जिन से हराया था. वही 2020 के चुनाव की बात करें तो विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के कौशल किशोर ने 1,648 वोटो के मार्जिन से कांग्रेस के रवि ज्योति कुमार को हराकर जीत दर्ज की थी. यह जदयू के लिए इस सीट पर एक महत्वपूर्ण जीत थी. जिसे एनडीए गठबंधन की स्थिति को और मजबूत बना दिया था. कौशल किशोर की जीत ने यह साबित किया कि नीतीश कुमार की विकास राजनीति इस क्षेत्र में अभी भी प्रासंगिक हैं.
रराजगीर विधानसभा सीट भारतीय लोकतंत्र का एक बेहतरीन उदाहरण है. जहां मतदाता सचेत है, और प्रदर्शन के आधार पर फैसले लेते है. यहां ना कोई पार्टी का स्थाई गढ़ है, और ना ही कोई अपराजेय नेता. पिछले दो विधानसभा चुनाव में दो अलग-अलग गठबंधन की जीत इस बात का प्रमाण है, कि राजगीर के मतदाता बदलाव के पक्षधर है, आने वाले चुनाव में भी राजवीर का यही परंपरा जारी रहने की संभावनाएं हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मौजूदा विधायक कौशल किशोर इतिहास रचते हैं, वह लगातार दूसरी बार जीत सकेंगे, या फिर राजगीर अपनी परंपरा को कायम रखते हुए इस बार फिर नए बदलाव को वोट देगी.