NDA और महागठबंधन दोनों में सब कुछ ठीक तो…गड़बड़ कहां है?

Bihar politics : बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राज्य की सियासत में नई हलचल दिख रही है. तारीखों के ऐलान के बाद से जाहिर सी बात है अब सबसे बड़ी चर्चा टिकट बंटवारे को लेकर है. चुनावी समीकरणों पर नजर रखने वाले जानते हैं कि हर बार सीटों का बंटवारा ही सबसे पेचीदा और अहम दौर होता है क्योंकि चुनाव में नतीजा कैसा रहेगा इसका अनुमान सीटों के बंटवारे से लग जाता है. खैर इस बार भी वही हो रहा है. सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक दावे और कयासों की बाढ़ है. कोई कह रहा है कि NDA हो या फिर महागठबंधन दोनों के भीतर सब कुछ तय हो गया है, तो कोई दावा कर रहा है कि दोनों गठबंधनों में अभी भी समीकरण बिगड़ सकते हैं. इस शोर-शराबे के बीच सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि जब सब कुछ ठीक तो… गड़बड़ कहां है?

दरअसल, चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही सियासी मोर्चे पर गति तेज हो गई है, लेकिन दोनों बड़े गठबंधन  एनडीए और महागठबंधन  में सीट बंटवारे को लेकर तस्वीर अब तक साफ नहीं हो पाई है. और यही इस वक्त की सबसे बड़ी जानकारी है.

एनडीए में गांठ कहां अटकी है

रिपोर्ट की मानें तो एनडीए के भीतर सीटों का फॉर्मूला बीजेपी और जेडीयू के बीच लगभग तय हो गया है और माना जा रहा है कि दोनों दल समायोजन कर चुके हैं. लेकिन चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के साथ समझौते की गांठ अब तक नहीं खुली है. सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी (रामविलास) लगभग 40 सीटों की मांग कर रही है, जबकि बीजेपी उन्हें 22 से 27 सीटों तक सीमित रखना चाहती है.लेकिन जो खबर है उसमें विवाद सिर्फ संख्या का नहीं है बल्कि चिराग पासवान अपनी पसंद की सीटों पर भी जोर दे रहे हैं. यानी वे सिर्फ सीटों की गिनती नहीं बल्कि उन क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं जहां उनकी पकड़ मजबूत है. इतना ही नहीं, एनडीए के एक अन्य घटक हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) के प्रमुख जीतन राम मांझी भी अपनी हिस्सेदारी को लेकर सख्त रुख में हैं. मांझी करीब 20 सीटों की मांग कर रहे हैं, जो एनडीए के भीतर की खींचतान को और बढ़ा रही है.

महागठबंधन में भी पूरी तस्वीर साफ नहीं

दूसरी तरफ महागठबंधन के भीतर भी हालात पूरी तरह से सहज नहीं हैं. रविवार की देर शाम विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने तेजस्वी यादव के आवास पर हुई मैराथन बैठक के बाद दावा किया कि सीट शेयरिंग फाइनल हो चुकी है. लेकिन सोमवार को फिर से महागठबंधन नेताओं की बैठक बुला ली गई. बताया जा रहा है कि इस बैठक में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और वाम दलों के साथ बात होनी है. साथ ही पशुपति पारस की पार्टी को कितनी सीटें दी जाएंगी, यह मुद्दा भी बाकी है. सबसे बड़ी पेचीदगी महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर मानी जा रही है. तेजस्वी यादव का चेहरा पहले से घोषित माना जाता रहा है, लेकिन इस पर भी आंतरिक मतभेद की खबरें हैं.

नए गठबंधन की भी अटकलें

इन सबके अलावा सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि मौजूदा हालात  को देखते हुए नए गठबंधन की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है. चिराग पासवान की नाराजगी और सीट बंटवारे पर असहमति को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि वे एनडीए से अलग भी हो सकते हैं. इस बीच यह खबर भी सुर्खियों में है कि चिराग पासवान और प्रशांत किशोर के बीच गठबंधन की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं. अगर ऐसा होता है तो बिहार के चुनावी परिदृश्य में एक तीसरे मोर्चे का उदय संभव है. यह न सिर्फ एनडीए बल्कि महागठबंधन की रणनीति पर भी असर डाल सकता है. हालांकि इसकी संभावना काफी कम है.

चुनाव के इस शुरुआती दौर में सीट बंटवारे पर खींचतान स्वाभाविक है, इसमें कोई संदेह नहीं कि बिहार के लिए यह चुनाव ऐतिहासिक मोड़ पर है. लेकिन जब तक टिकट बंटवारे पर धुंध साफ नहीं होती, तब तक मतदाताओं के मन में यही सवाल बना रहेगा सब कुछ ठीक तो…गड़बड़ कहां है?

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