cough syrup: देश में एक बार फिर दवाओं की क्वालिटी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा जिलों में बच्चों की अचाक तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए, जिनमें से कई बच्चों की मौत हो गई। जांच में पाया गया कि सभी बच्चों ने एक ही कंपनी का कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिया था। शुरुआत में इसे सामान्य बीमारी का मामला माना गया, लेकिन जब लक्षण एक जैसे दिखे और मौतें बढ़ने लगीं, तो स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल जांच के लिए भेजे।
जांच रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया। सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) नामक जहरीला कैमिकल पाया गया, जो सामान्य रूप से औद्योगिक इस्तेमाल में आता है और शरीर में जाने पर किडनी व लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। लैब रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु की एक लैब में इस कैमिकल की मात्रा मानक सीमा से कई गुना ज़्यादा — लगभग 48% तक — पाई गई। भोपाल की सरकारी लैब में भी सैंपल में ज़हरीला रसायन पाया गया।
यह सिरप Sresan Pharmaceuticals नाम की कंपनी द्वारा बनाया गया था, जिसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तमिलनाडु में है। जैसे ही रिपोर्ट आई, प्रशासन ने तुरंत कंपनी का पूरा प्लांट सील कर दिया और पुलिस ने मालिकों व अधिकारियों के खिलाफ मैनस्लॉटर (हत्या जैसे अपराध) का केस दर्ज किया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सभी राज्यों को इस कंपनी के उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश जारी कर दिया है।
किस किस राज्यों में हुई जांच?
इस घटना के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के बैच जब्त किए गए। अब तक करीब 1,500 से अधिक बोतलें बाजार से हटाई जा चुकी हैं। कुछ राज्यों ने दवा दुकानों को नोटिस भेजकर संदिग्ध बैच की रिपोर्ट देने को कहा है। केंद्र सरकार ने बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह सिरप देने से मना किया है और 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है।
विपक्षी दलों ने इस मामले में सरकार पर सख्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि देश में दवा निर्माण पर निगरानी कमजोर है और कई बार क्वालिटी चेक सिर्फ कागजों में रह जाता है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब दवाओं की जांच की इतनी प्रक्रिया है तो ऐसे जहरीले सिरप बाज़ार में कैसे पहुंच गए।
डॉक्टर ने क्या कहा !
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के सिरप में मौजूद केमिकल शरीर के अंदर जाकर किडनी को डैमेज करता है और बच्चों में पेशाब बंद होने जैसी दिक्कतें पैदा करता है। यही कारण है कि छोटे बच्चों की मौतें हो रही हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि माता-पिता बिना डॉक्टर की सलाह किसी भी खांसी की दवा न दें, क्योंकि छोटे बच्चों के लिए हल्की खांसी सामान्य होती है और ज़्यादातर मामलों में दवा की ज़रूरत नहीं पड़ती।
कितने बच्चों की ही मौत ?
अब तक अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 17 बच्चों की मौतें दर्ज की जा चुकी हैं और दर्जनों बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं। राज्य और केंद्र की जांच एजेंसियां लगातार सिरप के बैचों की टेस्टिंग कर रही हैं ताकि सही कारण स्पष्ट हो सके। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत सरकार से पूरी रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि दवाओं के निर्यात से पहले क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम को और मज़बूत किया जाए।