नीतीश के गढ़ से निशांत कर सकते हैं राजनीतिक पारी की शुरुआत, जानिए क्या कहता है हरनौत का समीकरण

Harnaut vidhanshabha seat: बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव 6 और 11 नवंबर 2025 को दो चरणों में होने जा रहे हैं, और वोटो की गिनती 14 नवंबर को होगी. नालंदा जिले का हरनौत विधानसभा क्षेत्र इस चुनाव में एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र है, और पिछले तीन दशकों से जनता दल यूनाइटेड का अजय किला बना हुआ है.

हरनौत विधानसभा क्षेत्र नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है. 1985 से लेकर के अब तक इस सीट पर नीतीश कुमार या उनकी पार्टी की उम्मीदवारों का दबदबक बना हुआ है. पिछले आठ विधानसभा चुनाव में किसी अन्य दल को यहां सफलता नहीं मिल पाई है. हालांकि, 1977 और 1980 में नीतीश कुमार को हरनौत के मतदाताओं ने नकारा था, लेकिन उसके बाद उन्होंने ही इस क्षेत्र से अपनी राजनीतिक यात्रा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

2020 की विधानसभा चुनाव हरनौत की राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. इस समय लोक जनशक्ति पार्टी के एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था, और चिराग पासवान के नेतृत्व में बिहार में आक्रामक अभियान चलाया था. लोजपा ने ममता देवी को मैदान में उतारा लेकिन जेडीयू के हरिनारायण सिंह ने उन्हें 27,241 वोटो के भारी अंतर से हराया था.

हरनौत की जनसंख्या और जेडीयू के लिए अनुकूल है. यह एक पूरी तरह ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है. जहां शहरी मतदाताओं की संख्या शून्य है. 2020 में अनुसूचित जातियों का प्रतिशत 24.5% था, जो एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है, और नीतीश कुमार की सामाजिक न्याय की नीतियों से प्रभावित है.

नीतीश कुमार ने अनुसूचित जातियां पिछड़ी वर्ग और महिलाओं की कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की है. जिनका सीधा लाभ हरनौत के मतदाताओं को मिला है. साइकिल योजना, छात्रवृत्ति, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम और सड़क निर्माण जैसे विकास कार्यो ने जेडीयू की जमीनी पकड़ को मजबूत बनाकर रखा है.

हरनौत विधानसभा क्षेत्र नालंदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. लोकसभा चुनाव में भी जेडीयू ने हरनौत में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन दिखाया है. 2024 लोकसभा चुनाव में जदयू के कौशलेंद्र कुमार ने सीपीआईएमएल लिबरेशन के डॉ संदीप सौरव को 1,69,114 वोटो के विशाल अंतर से हराया था.

6 और 11 नवंबर 2025 को होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में हरनौत सीट पर सभी की नज़रें टिकी हुई है 2020 में 27241 वोटो की शानदार जीत के बाद रेडियो और हरिनारायण सिंह एक बार फिर चौथी लगातार जीत की तैयारी में जुटे हुए हैं नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र होने के कारण विकास कार्यों का रिकॉर्ड मजबूत सामाजिक गठबंधन और 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रभावशाली जीत यह सभी कारक रेडियो के पक्ष में है विपक्ष के पास फिलहाल कोई मजबूत रणनीति या उम्मीदवार नजर नहीं आ रहा है

क्या हरनौत का यह अजय किला 2025 में भी अभेद्य रहेगा. राजनीति में कुछ निश्चित नहीं होता, युवा मतदाताओं की बदलती अपेक्षा, रोजगार का मुद्दा और विपक्ष की संभावित एकता, कुछ चुनौतियां पेश कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए 14 नवंबर को परिणाम आने पर हरनौत से एक बार फिर जेडीयू की जीत की घोषणा होने की प्रबल संभावना है.

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