Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई है. लालू प्रसाद यादव का गृह जिला सारण एक बार फिर बिहार की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है. 6 और 11 नवंबर 2025 को होने वाले विधानसभा चुनाव में छपरा और गरखा विधानसभा सीट केवल स्थानीय सत्ता के लिए बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिए भी निर्णायक युद्ध का मैदान बन गई है. जहां एक सीट पर एनडीए अपना परचम लहरा रहा है, तो वहीं दूसरी पर राजद का दबदबा कायम है.
एक गढ़ के 2 सीट की अलग कहानी
छपरा विधानसभा सीट सामान्य श्रेणी की ऐसी सीट है जिसे राजद अपना परंपरागत गढ़ मनाती आ रही है. लेकिन 2020 के चुनाव में भाजपा के सी एन गुप्ता ने यहां जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया था. यह जीत लालू यादव के गृह जिले में एनडीए की बढ़ती ताकत का प्रमाण थी. पिछले पांच विधानसभा चुनाव का विश्लेषण करें तो छपरा सीट पर किसी एक दल का अधिकार नहीं रहा राजद ने एक बार भी बीजेपी ने दो बार और जेडीयू ने दो बार यह सीट जीती है. यह बदलता हुआ राजनीतिक समीकरण दर्शाता है, कि यह मतदाता किसी एक दल के प्रति अंधभक्त नहीं है, बल्कि मुद्दों और नेतृत्व के आधार पर अपना फैसला करते हैं.
वही गरखा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, यहां की राजनीतिक दलित समुदाय की आकांक्षाओं के इर्द-गिर्द घूमती आ रही है. 2020 के चुनाव में राजद के सुरेंद्र राम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा के ज्ञानचंद मांझी को 9937 वोटो के अंतर से हराया था. यह जीत SC वर्ग में राजदा के मजबूत वोट बैंक को दर्शाती है, परिसीमन आदेश 2008 के अनुसार गरखा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में गरखा सामुदायिक विकास खंड और छपरा सीडी ब्लॉक के कुछ हिस्से शामिल है, यह क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहां की अधिकांश आबादी खेती-बाड़ी पर निर्भर करती है.
दोनों सीटों का राजनीतिक महत्त्व
छपरा और गरखा का दोनों सीट भले ही दो अलग-अलग सामाजिक राजनीतिक पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करती हो. लेकिन दोनों का सामूहिक परिणाम सारण जिले की राजनीतिक दिशा तय करती है. छपरा में यदि बीजेपी जीतती है तो यह साबित होगा कि लालू के गढ़ में भी एनडीए की जड़ मजबूत हो चुकी है. वहीं राजद की जीत उनके पुनरुत्थान का संकेत होगी. वहीं गरखा में राजद यदि अपनी सीट बचा लेती है, तो एससी वर्ग में उनकी पकड़ बरकरार रहेगी लेकिन एनडीए के लिए यह सीट जीतना दलित समुदाय में अपने विस्तार का प्रतीक करना होगा.
दोनों सीटों के पिछले दो विधानसभा चुनाव के नतीजे
छपरा सीट को राजद परंपरागत रूप से अपनगढ़ मनाती आ रही है लेकिन 2020 के चुनाव में बीजेपी सी एन गुप्ता ने यहां ऐतिहासिक जीत अपने नाम की जिस नतीजे ने सभी को चौंका दिया था बीजेपी के सी एन गुप्ता को 83412 वोट मिले, और राजद के रणधीर कुमार को 74617 वोट मिले 8795 वोटो के अंतर से बीजेपी के प्रत्याशी ने जीत अपने नाम की फिर 2015 का परिणाम यह रहा कि राजद के रणधीर कुमार ने बीजेपी के सी एन गुप्ता को 7268 वोटो के अंतर से हराया. पिछले पांच चुनाव पर नजर डालें तो यह सीट किसी एक दल की कब्जे में स्थाई रूप से कभी नहीं रही.
वहीं दूसरी और राजनीतिक दलित समुदाय की आकांक्षाओं की घूमती आ रही गरखा सीट 2020 में राजद के सुरेंद्र राम ने बीजेपी के ज्ञानचंद मांझी को 9937 वोटो से हराया था. 2015 में भी राजद के ही प्रत्याशी ने बीजेपी के केदारनाथ राम को 7372 वोटो से हराया था. छपरा और घर का दोनों सिम भले ही अलग-अलग सामाजिक और राजनीति का प्रतिनिधित्व करती हो लेकिन दोनों का संयुक्त परिणाम सारण की राजनीति की दिशा तय करता है.
छपरा और गरखा दोनों विधानसभा सीट 2025 के बिहार चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है. जहां छपरा सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच प्रत्यक्ष मुकाबला होगा वहीं गरखा सीट पर SC समुदाय की राजनीतिक और दलित नेताओं की भूमिका निर्णायक भूमिका निभाएगी.
लालू प्रसाद यादव के गृह जिले सारण में स्थित इन दोनों सीटों के परिणाम न केवल जिले के लिए, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति के लिए संकेतक हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि 2025 में मतदाता किस दिशा में जाते हैं एनडीए की विकास गाथा की ओर या फिर महागठबंधन की सामाजिक न्याय की राजनीति की ओर.