Atri Vidhansabha seat: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में गया जिले की अतरी सीट एक बार फिर राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बनने जा रही है यह सीट खास इसलिए भी है क्योंकि यह एक ही परिवार के पिछले तीन दशकों में छह बार विधायक बने हैं. वर्तमान विधायक अजय यादव उर्फ रंजीत यादव के पिता राजेंद्र यादव ने तीन बार मां कुंती देवी ने दो बार और खुद अजय ने एक बार इस सीट पर जीत अपने नाम की है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या 2025 में भी यादव परिवार का या राजनीतिक गढ़ बरकार रहेगा?
अतरी विधानसभा क्षेत्र बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से एक है और यह सीट नंबर 233 है या जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. अतरी विधानसभा क्षेत्र में चार प्रखंड शामिल है. इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग EBC की बड़ी आबादी निवास करती है. बिजली की किल्लत, पानी की समस्या, स्कूलों में ड्रॉपआउट की उच्च दर जैसे समस्याएं आज भी मौजूद है. इन्हीं समस्याओं के बीच अतरी की जनता अपने प्रतिनिधि चुनती आई है.
अतरी सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. 1951 में जब यह पहला चुनाव हुआ था तब निर्दलीय उम्मीदवार रामेश्वर प्रसाद यादव ने जीत हासिल की थी. उसके बाद कई दशकों तक यहां सीट विभिन्न दलों के बीच बदलती रही, हालांकि पिछले कुछ दशकों में अतरी सीट आरजेडी का मजबूत गढ़ बन गई है. राजेंद्र यादव और उनके परिवार ने यह राजनीतिक वर्चस्व स्थापित किया है. केवल 2010 में जदयू के कृष्णानंद यादव ने इस गढ़ को तोड़ा था. लेकिन उसके बाद फिर से यादव परिवार का राज्य कायम हो गया.
विधानसभा चुनाव की बात करें तो 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद की टिकट पर कुंती देवी ने अतरी सीट से चुनाव लड़ा था. उस समय बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी थी. अतरी में भी महागठबंधन की लहर दिखाई दे रही थी. राजद के कुंती देवी ने लोजपा के अरविंद कुमार सिंह को 13817 वोट के मार्जिन से हराया था. वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में यादव परिवार ने अपने बेटे अजय यादव और रंजीत यादव को मैदान में उतारा, जहां अजय यादव ने जदयू की मनोरमा देवी को 7931 वोटो के मार्जिन से हराया था. इस बार महागठबंधन टूट चुका था और राजद कांग्रेस एक तरफ जेडीयू बीजेपी दूसरी तरफ बिहार में एनडीए की सरकार बनी लेकिन अतरी में राजद का परचम ही लहरा रहा था.
अतरी विधानसभा सीट बिहार की उन चुनिंदा सीटों में से एक है. जहां एक ही परिवार ने लगातार राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखा है. 2025 का चुनाव यह तय करेगा कि क्या यादव परिवार का यह गढ़ बरकार रहता है, यह एनडीए इसे तोड़ने में कामयाब होती है. विकास के मुद्दे जातीय समीकरण और गठबंधन की रणनीति किसके लिए मददगार साबित होती है, वो 14 नवंबर को पता चलेगी जब वोटो की गिनती होगी.