New Delhi Railway stations: अक्टूबर की उमस भरी दोपहर में नई दिल्ली स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 16 के पास सभी स्वचालित टिकटिंग मशीनों के सामने लंबी कतारे हर मशीन पर तैनात सुविधकर्ता एक ही सवाल दोहराता है. कहां? कौन सी गाड़ी? किस समय?
जवाब में गूंजते हैं वही परिचित नाम पटना, मुजफ्फरपुर, आरा, गोरखपुर, कानपुर, दरभंगा, गया यह सिर्फ गंतव्य की सूची नहीं, बल्कि उन लाखों प्रवासियों की भावनाओं का पता है जो दिल्ली में रोजी-रोटी तो कमाते हैं लेकिन दिल और घर अभी भी बिहार और पूर्वांचल में ही बसा है.
20 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाएगी पांच दिन बाद 25 अक्टूबर से छठ पूजा शुरू होने वाली है. बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों प्रवासी इन त्योहारों पर अपने घर जाने की तैयारी में जुटे हुए हैं.
रेलवे की तैयारियां, भीड़ को संभालने की कवायद
त्योहार पर रेलवे पर भगदड़ कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार रेलवे प्रशासन ने पहले से ही कई अहम कदम उठाए हैं. 15 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक पूरे 13 दिनों के लिए दिल्ली एनसीआर के सभी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री रोक दी गई है. यह फैसला सिर्फ भीड़ नियंत्रण करने के लिए नहीं बल्कि वास्तविक यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है. नई दिल्ली स्टेशन पर 13 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदल दिए गए हैं, इसके पीछे का मकसद साफ है भीड़ को विभिन्न प्लेटफार्म पर बांटना ताकि अफरा तफरी और दुर्घटना से बचा जा सके. आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर दो विशाल पंडाल खड़े किए गए हैं जहां यात्री ट्रेन के इंतजार में आरामदायक तरीके से बैठ सकते हैं.
छठ पर फिर यामुन का झाग बना चुनौती
दिवाली और छत की तैयारी के बीच दिल्ली के सामने पुरानी और शर्मनाक समस्या फिर खड़ी हो गई है यमुना में विषैला जाग हर साल सर्दियों में खासकर दिवाली के बाद यमुना नदी की सतह पर सफेद जहरीले झांकी मोटी परत बढ़ जाती है यह जाग औद्योगिक अपशिष्ट और अनौपचारिक सीवेज का घिनौना सच हैं.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में घोषणा की है कि इस वर्ष छठ पर्व यमुना नदी के दोनों किनारो पर भव्य तरीके से मनाया जाएगा. सरकार का दावा है कि इस बार झाग की समस्या पहले जैसी नहीं होगी और श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ घाट तैयार किए जाएंगे. दिल्ली सरकार ने यमुना नदी की गाद और अतिक्रमण की स्थिति का आकलन करने के लिए आधुनिक तकनीक से सर्वे करने का फैसला किया है.
लेकिन सवाल यह है कि क्या महज कुछ दिनों में यमुना का कायाकल्प संभव है? पिछले दशकों में कई सरकारों ने यमुना को साफ करने के दावे किए, करोड़ों रुपए खर्च हुए लेकिन नदी की हालत बद से बदतर हो गई इस बार भी यह देखना होगा कि वादो और हकीकत में कितना अंतर है.
त्यौहार और चुनौतियां
दिवाली और छठ का यह समय दिल्ली के लिए हर साल परीक्षा की घड़ी लेकर आता है. एक तरफ लाखों यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा देना, दूसरी तरफ यमुना जैसे गंभीर पर्यावरणीय समस्या से निपटना, रेलवे की तैयारी सराहनीय है. लेकिन यमुना के मामले में अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है, जब तक दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर यमुना के प्रदूषण का स्थाई समाधान नहीं निकाल पाती तब तक हर साल छठ पर वही जहरीला झाग वही शर्मिंदगी और वहीं श्रद्धालुओं की मजबूरी दिखेगी.
इसी बीच दिल्ली के स्टेशनों से हर रोज हजारों लोग अपने घर के लिए रवाना हो रहे हैं, उनकी आंखों में त्योहारों की चमक है, दिल में परिवार से मिलने की खुशी और शायद यही वह भावना है जो इस पूरे शोर शराबे वीर भीड़ भाड़ और व्यवस्था की कमियों के बीच भी जिंदा है.