बेगूसराय का ‘सोने की फसल’ – जहाँ मिट्टी से निकलता था पीला धातु

बेगूसराय: मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरा-मोती भले हैं यह गाना हिंदी फिल्म उपकार का एक गीत हो, लेकिन क्या आपने सोचा है देश की किसी हिस्से की धरती के लिए यह पंक्ति उपयुक्त हो सकता है. जी हां ऐसा हम नहीं बल्कि बिहार के बेगूसराय जिला स्थित नौलागढ़ के रहने वाले किसानों का कहना है. यहां के किसान अपनी खेत में धान, मकई, गेहूं आदि की बुआई के लिए जाते हैं. इस दौरान खेत की चौपाई और फसल की कटनी के दौरान यहां के किसानों को सोने के सिक्के, चांदी, कौड़ी सहित कई प्रकार की कीमती सामान मिलता है. यही वजह है कि नौलागढ़ में खेत की गहरी जुताई पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

किसानों को खेती के दौरान मिलता है सोने-चांदी के सिक्के

नौलागढ़ गांव के रहने वाले शिवकुमार बताते हैं इस इलाके में राजा नल शासन करते थे. यहां के बड़े पोखर में सोने का नाव होने का दावा किया जाता है. वहीं स्थानीय किसान देव नारायण सहित अन्य ने बताया कि जब फसल लगाने के लिए जाते हैं तो खेत की जुताई के दौरान सोने के सिक्के, कौड़ी, चांदी सहित अन्य पाल कालीन कीमती सामाग्री मिलता है. यहां के हर घर में कीमती काले पत्थर की प्रतिमा आपको देखने के लिए मिल जाएगी.

जिला प्रशासन ने खुदाई पर लगाया है प्रतिबंध

स्थानीय ग्राम प्रधान अरुण प्रसाद सिंह बताते हैं इस गांव की आबादी 20 हजार है और 300 हेक्टेयर की पाल कालीन भूमि पर निवास करते हैं. आपको बता दें कि जिला प्रशासन के द्वारा यहां पर खुदाई को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके लिए बाकायदा सीओ की मॉनीटरिंग भी होती है. हालांकि फिर भी कुछ हिस्सों में तस्करों के द्वारा खुदाई कर संपत्ति को चोरी करने की कोशिश की जा रही है.

नौलागढ़ की सुरक्षा के लिए गार्ड था नियुक्त

बेगूसराय के जीडी कॉलेज के इतिहास विभाग के शिक्षक प्रो. अमिय कृष्णा ने बताया कि पुरातत्व विभाग लगातार देश के पौराणिक धरोहर को सामने लाने का काम कर रहा है. इस स्थान की खुदाई पर प्रतिबंध लगाया गया हैं . यहां सोना होने का दावा किया जा रहा है. इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है. वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां की धरोहर को सहेजने के लिए पुरातत्व विभाग के द्वारा एक गार्ड की नियुक्ति भी की गई थी. जिनकी 20 वर्ष पूर्व हीं मौत हो चुकी है. इसके बाद से इस स्थान पर प्रशासनिक उदासीनता के कारण अवैध खनन भी जोरों पर है.

नौलागढ़ में मौजूद है पाल कालीन दरबाजा

प्रो. अमिय कृष्णा ने बताया कि पाल कला, जिसे पाल-सेन कला या पूर्वी भारतीय कला भी कहा जाता है. वर्तमान भारत के बिहार और पश्चिम बंगाल राज्य के साथ बांग्लादेश से इसका संबंध रहा है. वहीं स्थानीय इतिहासकार यह दावा करते हैं कि नौलागढ़ के उत्तरी भाग में पोखर के पास राजा का मुख्य द्वार हुआ करता था. जिससे राजा अपने सोने के नाव से वर्तमान के भागलपुर सहित अन्य शहरों के अलावा चीन तक की यात्रा नदी के रास्ते ही करते थे. वहीं ऐसा भी माना जाता है कि यहां के राजा शक्तिपीठ जयमंगला गढ़ पूजा-अर्चना के लिए सोने के नाव से ही जाते थे.

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