Mahagathbandhan seat sharing: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की गाड़ी सीट बंटवारे के ब्रेकर पर पूरी तरह फस चुकी है। पहले चरण के नामांकन समाप्त होने के बावजूद दूसरे चरण के नामांकन के बीच भी कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच सीटों को लेकर खींचतान चरम पर है। सूत्रों की मानें तो यह विवाद अब महज सीटों की संख्या का नहीं बल्कि दोनों दलों के इगो का सवाल बन चुका है।
पहले चरण के नामांकन खत्म होने तक भी कम से कम 7 सीटर एसी है जहां महागठबंधन के घटक दल राजद कांग्रेस CPI और VIP के प्रत्याशियों ने आमने सामने पर्चा भर दिया है।इसमें गौड़ाबौराम जैसी सीट शामिल है, जहां RJD और कांग्रेस दोनों ने उम्मीदवार उतारे हैं। यह ‘फ्रेंडली फाइट’ गठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
चर्चा के केंद्र में कांग्रेस और राजद के बीच सीटों को लेकर गतिरोध है। राजद ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है, जबकि कांग्रेस मजबूत और जीती हुई सीट मांग रही है। बताया जा रहा था कि दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से बिहार कांग्रेस को साफ निर्देश है कि RJD के साथ मजबूती से बार्गेन करना है और किसी भी सूरत में कमज़ोर नहीं पड़ना है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों कई बैठकों के बाद भी बात फंसी रही। बीच में यह खबरें आईं कि RJD 135 और कांग्रेस 61 सीटों पर राजी हो सकती है। वहीं एक अन्य खबर के अनुसार, कांग्रेस 71 सीटों की मांग पर अड़ी थी, लेकिन बाद में 60 सीटों पर राजी हो गई थी। हालांकि, आधिकारिक घोषणा न होने और कई सीटों पर आमने-सामने की दावेदारी ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी स्तर पर विवाद बरकरार है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा कांग्रेस की संभावित अकेले चलो के दांव को लेकर है, चूंकि 122 सीट वाले दूसरे फेस के लिए नॉमिनेशन अभी जारी है। इसलिए कांग्रेस के पास ये दांव चलने का मौका है।कांग्रेस मजबूत सीटों की अपनी मांग मनवाने के लिए अकेले चुनाव का कार्ड चलकर RJD पर दबाव बढ़ाना चाहती है।
हालांकि यह भी तथ्य है कि दशकों से बिहार में कोई भी बड़ा दल अकेले चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं लेता है। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम एक बड़ा जुआ हो सकता है। जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है फिलहाल महागठबंधन के भीतरिया एगो वॉर कब खत्म होगा और क्या कांग्रेस वाकई बड़ा कदम उठाएगी यह सवाल बिहार की राजनीति में सस्पेंस बनाए हुए हैं।