Diwali in neighbour country’s: दिवाली जैसे दीपों की पंक्ति सिर्फ भारत की सांस्कृतिक आत्म नहीं बल्कि यह अब एक वैश्विक पर्व बन चुका है. यह रोशनी का त्योहार बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का शाश्वत संदेश देता है. भारत से निकल कर भारतीय प्रवासियों और स्थानीय संस्कृतियों के मेल से, दिवाली ने दुनिया के कोने कोने में अपनी अनोखी पहचान बनाई है, चाहे वह न्यूयॉर्क के टाइम स्क्वायर की जगमगगाहट हो, या थाईलैंड का जल-दीपों से भरा लोय क्रथोंग, या नेपाल का पाँच दिवसीय तिहार हो हर देश की दिवाली का रंग भले ही अलग हो लेकिन भावनाएं एक होती है.
भारत के पड़ोसी देश जहां मनाई जाती है दिवाली
नेपाल: स्वान्ति (तिहार) महोत्सव की धूम
हमारे पड़ोसी देश नेपाल में दिवाली को स्वान्ति या तिहार के नाम से जाना जाता हैं. यह भारत की दिवाली से मिलता जुलता है पर अपनी विशेष परंपराओं के साथ 5 दिनों तक चलने वाला एक अनोखा पर्व है.पहले दिन कौवों को, दूसरे दिन कुत्तों को भोजन कराया जाता है, उन्हें यमराज के दूत के रूप में सम्मान दिया जाता है. तीसरा दिन देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा और घरों को दीपों से सजाने के लिए समर्पित होता है. चौथा दिन नेपाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है, और पाँचवें दिन भाई टीका (भारत का भाई दूज) होता है, जहाँ बहनें भाइयों के माथे पर सप्तरंगी टीका लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं.
अमेरिका और ब्रिटेन: व्हाइट हाउस और लंदन की चमक
अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या के साथ दिवाली एक प्रमुख सांस्कृतिक और राजनीतिक आयोजन बन चुकी है. न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और न्यू जर्सी में भव्य समारोह होता है. टाइम स्क्वायर पर कार्यक्रम होते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण व्हाइट हाउस में भी राष्ट्रपति द्वारा दिवाली समारोह का आयोजन होता है. लंदन में विशेष कर लेस्टर शहर में भारत के बाहर सबसे बड़ा दिवाली उत्सव मनाया जाता है. इन दोनों देशों में दिवाली का राजनीतिक महत्व, व्हाइट हाउस और ट्रैफ़लगर स्क्वायर जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर समारोह आयोजित होना।
थाईलैंड: लोय क्रथोंग का जादुई त्योहार
थाईलैंड में दिवाली के समान ‘लोय क्रथोंग’ नामक एक जादुई प्रकाश पर्व मनाया जाता है, हालांकि यह त्योहार भारत की दिवाली से अलग मूल का है. इस दिन केले के पत्तों और फूलों से सजे सुंदर तैरते हुए दीपक बनाए जाते हैं जिन्हें क्रथोंग कहा जाता है. रात में लोग इन दीपकों को नदियों और झीलों में प्रवाहित करते हैं. यह जल देवी को सम्मान देने और जीवन से नकारात्मकता को दूर भगाने का प्रतीक माना जाता है.
श्रीलंका: तमिल समुदाय का दीपावली उत्सव
श्रीलंका में रहने वाला तमिल हिंदू समुदाय दिवाली को बड़े उत्साह के साथ दीपावली के नाम से मनाता है. यह पर्व रावण पर भगवान राम की विजय के साथ-साथ नरकासुर पर कृष्ण की विजय से भी जोड़ा जाता है. लोग सुबह जल्दी उठकर तेल स्नान करते हैं (इसे गंगा स्नान के समान पवित्र माना जाता है), नए वस्त्र पहनते हैं और घरों में विशेष पूजा (पोसई) करते हैं. परिवार में मिठाइयाँ बांटी जाती हैं और उपहारों का आदान-प्रदान होता है.
मलेशिया और सिंगापुर: भव्यता और अवकाश का संगम
मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में दिवाली को राष्ट्रीय अवकाश प्राप्त है, जो यहां भारतीय संस्कृति के महत्व को दर्शाता है. भारतीय मूल के लोग पारंपरिक तरीके से दिवाली मनाते हैं. लिटिल इंडिया जैसे क्षेत्रों में शानदार सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य प्रतियोगिताएं और संगीत समारोह आयोजित होते हैं. लोग मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और एक-दूसरे के घर जाकर बधाइयां देते हैं.
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा: बहुसांस्कृतिक आयोजन
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे बहुसांस्कृतिक देशों में दिवाली को राष्ट्रीय सद्भाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है. सिडनी हार्बर और फेडरेशन स्क्वायर में भारतीय संस्कृति का भव्य प्रदर्शन होता है, जिसमें बॉलीवुड डांस और पारंपरिक संगीत शामिल होते हैं. टोरंटो और वैंकूवर में दिवाली ऑन दि स्क्वायर जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं. कनाडा की संसद में भी दिवाली समारोह आयोजित होता है.
मॉरीशस और फिजी: हिंद महासागर की रोशनी
मॉरीशस (जहाँ लगभग 70% आबादी भारतीय मूल की है) और फिजी जैसे प्रशांत महासागरीय द्वीपों पर दिवाली एक राष्ट्रीय पर्व है. पूरा देश दीपों से जगमगाता है. मॉरीशस में गंगा तलाओ नामक पवित्र झील के किनारे विशेष पूजा होती है. फिजी में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम और भोज का आयोजन होता है.
यूएई और खाड़ी देश: रेगिस्तान में भारतीय चमक
दुबई, अबू धाबी जैसे खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों के कारण दिवाली पारंपरिक तरीके से मनाई जाती है. होटलों और शॉपिंग मॉल में विशेष सजावट और ऑफर होते हैं. बुर्ज खलीफा पर भी दिवाली के अवसर पर शानदार लाइट शो किया जाता है.
वैश्विक एकता का दीपोत्सव
दिवाली आज की एक धार्मिक या कक्षेत्रीय त्यौहार नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक विरासत बन चुकी है. यह हमें सीखती है प्रेम आशा और सकारात्मक की किरण दुनिया के हर कोने में अंधकार को दूर कर सकती है. नेपाल के पहाड़ हो, या थाईलैंड की नदियां अमेरिकी महानगर हो या मॉरीशस के समुद्र तट हर जगह जलता दिवाली का दीप मानवता को एक सूत्र में बांधने का संदेश देता है.