Schizophrenia myth or truth: स्कीजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक अव्यवस्था है जो व्यक्ति की सोचने, महसूस करने और व्यवहार को समझने की क्षमता को प्रभावित करता है. भारत में इस बीमारी को लेकर अनेक मिथ्य हैं, जिनके कारण मरीजों और उनके परिवार को कलंक ओर भेदभाव का सामना करना पड़ता है.
क्या है स्कीजोफ्रेनिया ?(SCHIZOPHRENIA)
स्कीजोफ्रेनिया एक दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जो आमतौर पर किशोरावस्था के अंत या युवा व्यस्कता में शुरू होती है. यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकती हैं. भारत में लगभग 1–2% आबादी इस विकार से प्रभावित है, लाखों लोग ओर उनके परिवार इससे जूझ रहे है.
कैसे पहचाने स्कीजोफ्रेनिया के मरीजों को
स्कीजोफ्रेनिया को तीन श्रेणियों में बंटा गया है–
1.साकारात्मक लक्षण
मतिभ्रम (Hallucinations): ऐसी चीज देखना सुनना या महसूस करना जो वास्तव में मौजूद नहीं है सबसे आम है आवाज सुनना.
भ्रम (Delusion): दृढ़ विश्वास जो वास्तविकता पर आधारित नहीं है.स्कीजोफ्रेनिया के मरीजों का मानना है कि कोई उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है या वह कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति है.
अव्यवस्थित सोच: विचारों में उलझन बातचीत में अचानक विषय बदलने या ऐसा कुछ बोलना जिसका कोई अर्थ ना हो.
असामान्य व्यवहार: अजीब हरकतें करना, बेचनी या अनुपयुक्त प्रतिक्रियाएं.
2. नकारत्मक लक्षण
भावनाओं को व्यक्त करने में परेशानी,
सामाजिक गतिविधियों से दूर रहना,
रोजमर्रा के कामों में रुचि की कमी
3. संज्ञानात्मक लक्षण
ध्यान केंद्रित करने में समस्याएं,
याददाश्त में कमी,
निर्णय देने में कठिनाई
कुछ मिथ्य जो सच और झूठ के बीच फंसे हैं
1. स्कीजोफ्रेनिया की सबसे बड़ी गलतफहमी है कि स्कीजोफ्रेनिया में व्यक्ति का व्यक्तिव विभाजित नहीं होता. यह एक मानसिक संबंधी विकार है जिसमें व्यक्ति को वास्तविकता को समझने में परेशानी होती हैं.
2. स्कीजोफ्रेनिया एक चिकित्सीय स्थिति है जो मास्तिक के रसायनों में असंतुलन, आनुवंशिक कारकों और पर्यावरणीय तनाव के कारण होता है. अंधविश्वास से कोई लेना देना नहीं है.
3. अधिकांश स्कीजोफ्रेनिया से पीड़ित लोग हिंसक नहीं होते है.
4. यह बीमारी लाइलाज है लेकिन सही उपचार और सहायता से कई लोग सामान्य जीवन जी सकते है.
क्यों होता है स्कीजोफ्रेनिया?
स्कीजोफ्रेनिया का कोई एक कारण नहीं है, यदि परिवार में किसी को स्कीजोफ्रेनिया पहले से यह बीमारी है, तो जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन यह निश्चित नहीं है कि यह होगा कि नहीं होगा. डोपामिन और ग्लूटामैट जैसे न्यूरोट्रांसमीटर में संतुलन होना मासिक रसायन की कमी को दर्शाता है. गर्भावस्था या जन्म के दौरान, बचपन में आघात, गंभीर तनाव या नशीली दावों का उपयोग करने से भी यह बीमारी हो सकती है.
भारत में उपलब्ध हेल्पलाइन
वनडरेवाला फाउंडेशन : 1860–2662–345
NIMHANS : 080–46110007
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अधिकांश सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या कम लागत पर उपचार उपलब्ध है. मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 के तहत मानसिक बीमारी वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण देखभाल का अधिकार देता है.
स्कीजोफ्रेनिया एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य विकार है. यह किसी की कमजोरी या अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सा स्थित है. जिसके लिए देखभाल और उपचार की आवश्यकता सही जानकारी, शीघ्र हस्तक्षेप, नियमित उपचार और परिवार के समर्थन से स्कीजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति सार्थक और संतोषजनक जीवन जी सकता है.