Golu hatyakand: 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुजफ्फरपुर में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए गोलू अपहरण कांड का जिक्र किया और राजद के जंगल राज पर तीखा प्रहार किया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राजद के शासनकाल में करीब 35 से 40 हजार अपहरण हुए है, यही जंगल राज की हकीकत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजद और कांग्रेस को पांच चीजों से पहचाना जाता है– बंदूक, क्रूरता, कड़वाहट, कुशासन और भ्रष्टाचार। पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष की वही खतरनाक मानसिकता वापस आ रहा है– उनके चुनावी गानों में गोली, पिस्तौल और डबल बैरल बंदूक की ही बाते ही होती है।
पंजाब नेशनल बैंक में नौकरी करने वाले मुजफ्फरपुर के गोला रोड इलाके में रहने वाले रतन सिंह की तीन संताने थी, उनका एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार था। 20 सितंबर 2001 की सुबह भी सामान्य थी 2 बेटियों और 5 साल का गोलू स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे। जेल रोड के पास रिक्शा में बैठकर जब तीनों बच्चे स्कूल की तरफ बढ़ रहे थे, तभी कुछ हथियारबंद लोगों ने रिक्शा रोक कर दिन के उजाला में, भरी सड़क पर, लोगों के सामने मारुति वैन में गोलू को जबरन बिठा लिया गया।
तत्कालीन एसपी नैय्यर हसनैन खान के नेतृत्व में पुलिस टीम गोलू की तलाश में जुटी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 25 सितंबर 2001 को वह खबर आई जिसने हर दिल को तोड़ दिया। हाथोड़ी थाना क्षेत्र में एक लाश मिली पिता रतन सिंह ने कपड़ों से अपने गोलू को पहचान लिया।
गोलू की लाश की पहचान होते ही मुजफ्फरपुर में आग लग गई। पहले से सुलगता शहर भभक उठा। 26 सितंबर 2001 को सरैयागंज गोला रोड और पंकज मार्केट इलाके से जुलूस शुरू हुआ। यह कोई साधारण विरोध नहीं था। 1977 के आंदोलन के बाद यह पहली बार था जब मुजफ्फरपुर शहर में पुलिस और प्रशासन के खिलाफ इतना बड़ा जन विद्रोह हुआ। 1 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए थे, दुकान बंद हो गई थी, वाहन रुक गई, पूरा शहर ठप हो गया।
उग्र भीड़ ने भगवानपुर में रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन में आग लगा दी। शहर के हर थाने के बाहर प्रदर्शनकारी जमा हो गए। बवाल थमने के बजाय बढ़ गया। एसपी को हटाया गया। नए एसपी को पटना से हेलीकॉप्टर से चार्ज लेने भेजा गया। 2 दिन 26 और 27 को शहर में कर्फ्यू लागू रहा। पुलिस के लिए स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया। काजी मोहम्मदपुर थाना के पास छाता चौक और टेक्निकल चौक के बीच समता पार्टी का कार्यालय था। समता पार्टी ऑफिस के सामने भीड़ जमा थी। नारेबाजी हो रही थी। पुलिस की लापरवाही के खिलाफ आक्रोश चरम पर था। तभी पुलिस ने गोलियां चला दीं।
छाता चौक पर पुलिस की गोली से दो छात्रों की जान चली गई। इस इलाके में उस समय बड़ी संख्या में छात्र निजी लॉज में रहते थे। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे गलत समय पर गलत जगह पर थे। 26 और 27 सितंबर को शहर के अधिकांश थानों के बाहर पुलिस ने गोलियां चलाई। दो दिनों में 13 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। इनमें छात्र थे, कर्मचारी थे, कामगार थे। गोलू की एक मौत ने 13 और जिंदगियां छीन लीं थी।
गोलू हत्याकांड में कोर्ट ने 2009 में सजा सुनाई। विनोद राय, उदय साह, राम शोभित पासवान, सुनील कुमार को उम्र कैद की सजा दी।