Bihar assembly election 2025: 6 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 58 सीटों पर मतदान होगा. मिथिलांचल, कोसी, मगध क्षेत्रों को कवर करने वाले इस चरण में कई हाई प्रोफाइल सीटें और बड़े राजनीतिक समीकरण जैसे इन सीटों पर सिंगर मैथिली ठाकुर (BJP-अलीनगर), कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर (जन सुराज-मोरवा), बाहुबली अनंत सिंह (JDU-मोकामा) और CM नीतीश कुमार के गढ़ हरनौत समेत कई अहम सीटें दांव पर लगी हैं. वर्तमान रुझान स्पष्ट रूप से NDA गठबंधन की निर्णायक बढ़त की ओर इशारा कर रहे हैं, जबकि महागठबंधन आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है.
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
2020 के चुनाव और वर्तमान परिदृश्य में प्रमुख बदलाव आए है, जो इस चरण के नतीजों को प्रभावित कर सकते है. चिराग पासवान की LJP(R) अब NDA का हिस्सा हैं, जबकि 2020 में अकेले लड़कर JDU को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. मुकेश साहनी की VIP तब NDA का हिस्सा थी, अब महागठबंधन में शामिल है, लेकिन उनकी पार्टी की स्थिति कमजोर दिख रही है. उपेंद्र कुशवाहा की RLM अब NDA के साथ है, जिससे गठबंधन को कुशवाहा वोट बैंक को साधने में मदद मिल रही है. वही दूसरी ओर गौरा, बौराम, बछवाड़ा और बिहार शरीफ जैसी सीटों पर गठबंधन के सहयोगी दलों (VIP vs RJD, CONGRESS vs CPI) के बीच आंतरिक टकराव देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है.
NDA की मजबूती की प्रमुख कारण
2020 में चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने लगभग 42 सीटों पर NDA को नुकसान पहुंचाया था. उनका वापिस गठबंधन में शामिल होना गेमचेंजर साबित हो सकता है. जहां पासवान वोटबैंक और मिथिलांचल के मल्लाह समुदाय का बड़ा हिस्सा भी NDA के पक्ष में संगठित हो रहा है. नीतीश कुमार के खिलाफ कोई भी एंटी इन्काम्बेंसी नहीं है, महिलाओं में आज भी उनकी लोकप्रियता बरकरार है, जिसका श्रेय उनकी कल्याणकारी योजनाओं को जाता है. जीविका योजना के तहत 1.21 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपए की सहायता दी गई, यह बिहार की कुल महिला वोटर का 35% हैं. परिवारों को मिलाकर लगभग 3.63 करोड़ वोटर प्रभावित होते हैं, जो सीधे महिला वोट को NDA के पक्ष में मोड़ रहा है. नरेंद्र मोदी की मजबूत छवि का नैरेटिव गैर जातिगत वोटरों को भी NDA की ओर आकर्षित कर रही है.
महागठबंधन के सामने चुनौतियां
महागठबंधन को इस चरण में अपने खराब प्रदर्शन के चलते चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. महागठबंधन के सहयोगी दल (कांग्रेस, VIP, CPI-ML) का प्रदर्शन खराब रह सकता है.कांग्रेस 13 में से केवल एक बेनीपुर सीट पर आगे दिख रही है. मुकेश सहनी की VIP 4 सीटों पर लड़ रही है, लेकिन किसी पर बढ़त नहीं है. CPI-ML 6 में से केवल पटना की पालीगंज सीट पर आगे है. गौरा बौराम (VIP vs RJD), बछवाड़ा (कांग्रेस vs CPI), और बिहार शरीफ (कांग्रेस vs CPI) जैसी सीटों पर गठबंधन के भीतर ही उम्मीदवार लड़ रहे हैं, जिससे NDA को सीधा फायदा मिल रहा है. जहां ये भी माना जा रहा है कि, तेजस्वी यादव अपने पिता लालू प्रसाद यादव के समय की 2005 से पहले की जंगलराज वाली इमेज से बाहर नहीं निकल पाए हैं, जिससे गैर-यादव और सवर्ण वोटर दूर हो रहे हैं.
इन सीटों पर हैं कड़ी टक्कर
हरनौत – हरिनारायण सिंह (JDU) CM नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र। विधायक हरिनारायण सिंह 9 बार से जीत रहे हैं. यह JDU मजबूत हैं.
मोकामा – अनंत सिंह (JDU) vs वीणा देवी (RJD) बाहुबली vs बाहुबली की पत्नी. अनंत सिंह की रॉबिनहुड इमेज, भूमिहार वोट संगठित. अनंत सिंह (JDU) आगे (कांटे की टक्कर)
दानापुर – रामकृपाल यादव (BJP) vs रीतलाल यादव (RJD) रीतलाल जेल से चुनाव लड़ रहे हैं, शहरी वोट पर BJP की पकड़. यादव वोट में सेंध की संभावना. रामकृपाल (BJP) मजबूत.
अलीनगर – मैथिली ठाकुर (BJP) vs बिनोद मिश्रा (RJD) सिंगर मैथिली की लोकप्रियता बनाम पग विवाद. स्थानीय (ब्राह्मण) वोट RJD के साथ. टाइट मुकाबला हो सकता हैं.
मोरवा – रणविजय साहू (RJD) vs जागृति ठाकुर (जन सुराज) कर्पूरी ठाकुर की पोती (जन सुराज) से चुनौती. RJD का MY समीकरण (30% वोटर) मजबूत. RJD आगे.
ब्रह्मपुर – शंभू नाथ यादव (RJD) vs हुलास पांडे (LJP-R) 26% यादव वोटर। RJD का मजबूत MY गढ़। हुलास पांडे को 2020 में भी हराया था। RJD आगे.
सिमरी बख्तियारपुर – युसूफ सलाहुद्दीन (RJD) vs संजय सिंह (LJP-R) RJD का कोर MY समीकरण बहुत मजबूत. RJD आगे.
जाति और योजनाओं का विकास
पहले चरण की 58 सीटों पर NDA गठबंधन को स्पष्ट और निर्णायक बढ़त मिलती दिख रही है. इस जीत की नींव में चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के दोबारा साथ आने से जातियों का संगठन, जीविका योजना से महिला वोटरों का मजबूत समर्थन, और नीतीश-मोदी की संयुक्त लोकप्रियता शामिल है. वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती है आंतरिक कलह, Congress, VIP का खराब प्रदर्शन और RJD का अपनी जंगलराज इमेज से पूरी तरह बाहर न निकल पाना. बिहार की राजनीति का अटल सत्य है कि जातीय समीकरण अभी भी सबसे बड़ा फैक्टर है, जहां इस चरण में NDA का पलड़ा भारी दिख रहा है.