Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा न केवल गंगा स्नान और दान पुण्य के लिए जानी जाती है, बल्कि इसका गहरा संबंध भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य अवतार से भी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि पर आए महाप्रलय के दौरान भगवान विष्णु ने इसी शुभ तिथि पर मछली का विशाल रूप धारण कर धर्म ज्ञान और जीवन की निरंतरता की रक्षा की थी।
यह कथा धर्मपरायण राजा सत्यव्रत से जुड़ी है। एक बार राजा की माला नदी में स्नान कर रहे थे और जब उन्होंने अंजलि में जल दिया, तो उसमें एक छोटी सी मछली आ गई। मछली ने राजा से प्रार्थना कि वह उसे नदी के बड़े जीवों से बचाए। राजा ने पहले उसे कमंडल फिर मटकी और अंत एक विशाल सरोवर में रखा, लेकिन हर बार मछली का आकार बढ़ता गया। जब मछली का आकार इतना विशाल हो गया, कि वह राजा को अचंभित करने लगा तब राजा ने हाथ जोड़कर पूछा कि आप कौन है? इस पर मछली रूपी भगवान विष्णु ने अपना दिव्य रूप प्रकट किया उन्होंने राजा को बताया कि आज से सातवें दिन भयंकर जल प्रलय आएगा जिसमें संपूर्ण पृथ्वी जलमग्न होने वाली है।
भगवान विष्णु ने राजा सत्यव्रत को आदेश दिया कि वह सप्त ऋषियों और पृथ्वी के समस्त जीवों तथा प्राणियों के जोड़ों को लेकर एक विशाल नाव में सुरक्षित कर लें। उन्होंने यह भी बताया कि हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुराकर समुद्र की गहराई में छिपा दिया है, जिससे सृष्टि के ज्ञान का आधार संकट में है। प्रलय के भयंकर जलप्रवाह में, मत्स्य रूपी भगवान ने स्वयं उस नाव को एक विशाल सींग से बाँधकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। प्रलय शांत होने पर, उन्होंने दैत्य हयग्रीव का वध किया और चुराए गए वेदों को वापस लाकर ब्रह्मा जी को सौंपा दिया।
भगवान विष्णु का अद्भुत अवतार धर्म की रक्षा ज्ञान के संरक्षण और सृष्टि के पुनर्निर्माण का प्रतीक है। यही कारण है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है। इस दिन गंगा स्नान व्रत और दान पुण्य करने से भक्त भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब जब धर्म पर संकट आता है भगवान स्वयं किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म और जीवन की रक्षा करते हैं। भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार न केवल सृष्टि के उधर की कहानी है बल्कि जीवन की कथा और आध्यात्मिक की शक्ति का भी प्रतीक है।