Kartik Purnima: हिंदू पंचांग में कार्तिक मास की पूर्णिमा का एक ऐसा दिन है जब धरती और स्वर्ग के बीच की दूरी मिट जाती है, माना जाता है कि इस दिन आत्मा की शुद्धि ही नहीं जीवन का कायाकल्प भी बदल जाता है। इस दिन किया गया प्रत्येक शुभ कर्म अनंत गुना फल देने वाला माना जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा के भोर में गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ अपने आप में ही एक अलौकिक दृश्य दर्शाती है। धार्मिक ग्रंथो में इस दिन के स्नान को कोटि तीर्थ स्थान के नाम से जाना जाता है। जब सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में कोई व्यक्ति गंगा यमुना गोदावरी या किसी भी पवित्र नदी में डुबकी लगाता है, तो उसके जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। माना जाता है कि स्नान केवल शरीर की सफाई नहीं बल्कि मन और आत्मा की गहरी शुद्ध का माध्यम है।
कार्तिक पूर्णिमा वह विरल दिन है जब भगवान विष्णु महादेव और माता लक्ष्मी तीनों की उपासना एक साथ की जाती है। शास्त्रों में इसे त्रिदेव स्नान भी कहा जाता है,इस दिन की गई पूजा अर्चना से घर में सुख समृद्धि और ऐश्वर्या का वास होता है।
कार्तिक पूर्णिमा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन को नई दिशा देने और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य अवसर है इस दिन की गई साधना और सेवा मनुष्य को मोक्ष के द्वार पर अग्रसर करती है।