Mukhiymantri mahila rojgaar yojna: बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणाओं से ठीक पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को जिस तेजी से एक उपनाम मिला है वह उसकी लोकप्रियता का एक संकेत है. वहीं दूसरा संकेत जमीन पर महिला लाभार्थियों की आवाज है जो इस योजना को दशहजारी पुकार रही है.
अन्य राज्यों की योजना से अलग है बिहार की योजना
जहां चुनाव पूर्व महिला उन्मुख योजनाएं अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक आजमाई गई है, वहीं बिहार की योजना दूसरों से महत्वपूर्ण रूप से अलग है. राज्यों में ज्यादातर ऐसी योजनाएं चाहे वह मध्य प्रदेश में लाडली बहन हो या महाराष्ट्र में लड़की बहन, मुख्य रूप से बिना शर्त हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू बोझ को कम करने के लिए महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, लेकिन बिहार की योजना खुद को महिलाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक उत्पाद रोजगार उन्मुख हस्तक्षेप के रूप में प्रस्तुत कर रही है.
यह घोषणा 29 अगस्त को की गई जहां योजनाओं में महिला उद्यमियों के लिए कुल 2.10 लख रुपए किस्तों में देने का वादा किया गया है, ताकि वह अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सके. यह दुकान खोलना डेयरी या कपड़े सिलाई शुरू करना ब्यूटी पार्लर या कला से संबंधित काम हो सकता है. पहली किस्त ₹10000 की 1.21 करोड़ से अधिक संभावित उद्मियों के खातों में जमा कर दी गई है, जो राज्य सरकार की स्वयं सहायता जीविका योजना के तहत नामांकित हुई है.
सूत्रों के अनुसार योजना का डिजाइन जानबूझकर किया गया था, क्योंकि नीतीश सिद्धांत रूप से नकद देने के खिलाफ रहे हैं. एक वरिष्ठ जेडीयू पदाधिकारी ने कहा अपने 20 साल के शासन में नीतीश कुमार ने कई महिला केंद्रित योजनाएं शुरू की है, लेकिन किसी में भी नकद दान शामिल नहीं है. वह महिलाओं को सशक्त बनाने वाली नीतियों के पक्षधर है. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से पहले ऐसी योजनाओं की प्रवृत्ति और राजद द्वारा सत्ता में आने पर सभी महिलाओं को ₹2500 के नकद दान की घोषणा को देखते हुए नीतीश सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा फिर भी जेडीयू पदाधिकारी ने कहा महिला मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना सशक्तिकरण और नकद दान का एक मिश्रण है.
महिलाओं का उत्साह, सोच में आया व्यवसाय
बेगूसराय, मुंगेर, जमुई, पटना, पश्चिम चंपारण, सिवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और जिलों मैं भी महिला लाभार्थी न केवल ₹10000 के लिए आभारी है, बल्कि अधिक पाने के लिए अधिक करने को लेकर उत्साहित भी है. हर जिले के महिलाओं में खुशी की लहर है, वह कहती है कि नीतीश कुमार ने हमारे बारे में सोचा उनकी अन्य महिला योजनाएं जैसी लड़कियों के लिए साइकिल और स्कूल यूनिफॉर्म, कुछ महिलाएं तो अपने विस्तृत परिवार में नौकरी पाने वाली पहली है. वह केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए 35% कोटा (2013 में 2016 में से सभी सरकारी नौकरी तक विस्तारित किया) शुरू किया. महिलाओं की सोच में व्यवसाय आने लगा है. कई महिलाओं ने सोच भी लिया है कि उन्हें क्या करना है, जैसे कपड़े सिलाई का केंद्र शुरू करना है या कुछ और… कुछ महिलाएं तो यहां तक कहा करतीं है कि भले उनके परिवार में लोग दूसरी पार्टी को समर्थन देते हो लेकिन उनका समर्थन नीतीश कुमार को ही जाएगा.
MMRY से पुरुषों में असहजता
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को चुनाव के लिए गेम चेंजर बताते हुए यह कहा गया कि यह योजना हमारे महिला वर्ग को मजबूत करेगी अगर कुछ असहजता है भी तो इस बात को लेकर के, की महिलाएं अब कैसे खुद को मुखर कर रही है. पर कुछ पुरुषों के मुताबिक नीतीश ने महिलाओं को घमंडी बना दिया है.. कुछ जगहों के पुरुष यह शिकायत कर रहे हैं कि घरों में संतुलन बिगड़ने के लिए यह सब योजनाएं चालू कर दी गई है… नीतीश जो सुविधा दे रहे हैं उसके कारण वह अब हमारी बात नहीं सुनती वह अपने दम पर बाजार भी जाती है… पुरुषों की अब कोई कीमत नहीं रही…
इंद्रा गांधी से मिली प्रेरणा
राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार जिन्होंने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और नीतीश दोनों के साथ करीब से काम किया है, कहते हैं कि नीतीश की महिला योजनाओं के लिए प्रेरणा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गरीबों और महिलाओं के प्रति पहुंच थी. वह कुछ अलग-अलग करना चाहते थे यह पंचायत में महिलाओं के लिए 50% कोटा से शुरू हुआ और साइकिल योजना और आधा दर्जन अन्य कल्याण और शिक्षा योजना की ओर ले गया. राजनीतिक विश्लेषक ने यह भी कहा कि नीतीश ने एक बार कहा था लोग मेरी सरकार की आलोचना कर सकते हैं लेकिन कोई भी बिहार के मुख्यमंत्री को गाली नहीं देगा…