Digital census: डिजिटल जनगणना का मतलब है जनगणना के पारंपरिक कागजी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पूरा करना। यह भारत की जनगणना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव है जिसका उद्देश्य गणना को तेज सटीक पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।
क्या होती हैं डिजिटल जनगणना
डिजिटल जनगणना में, आंकड़ों को कागज के फॉर्म में भरने के बजाय डिजिटल उपकरणों जैसे स्मार्टफोन या टैबलेट में दर्ज किया जाता है।पारंपरिक जनगणना में घर घर जाकर के डाटा कलेक्ट करके बाद में स्कैन और प्रोसेस करने में काफी समय लगता था।डिजिटल जनगणना में मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर केजानकारी तुरंत डिजिटल रूप में रिकॉर्ड हो जाती है।
तकनीकी तौर पर कैसे होती है लोगों की गणना?
डिजिटल जनगणना की पूरी प्रक्रिया कई तकनीकी पहलुओं पर निर्भर करती है
1.मोबाइल एप्लिकेशन और डेटा संग्रह
गणनाकारों को एक यूनिक आईडी और पासवर्ड के साथ लॉग इन करने के लिए एंड्रॉइड और आईओएस दोनों के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन प्रदान किया जाता है।यह ऐप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में काम करता है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी डेटा संग्रह सुनिश्चित होता है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कम हो सकती है।जैसे ही डेटा दर्ज करते हैं, या जब वे इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्र में आते हैं, तो जानकारी सीधे सर्वर पर अपलोड हो जाती है। इससे मैनुअल डेटा एंट्री और प्रोसेसिंग की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
2. स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा
नागरिक को एक समर्पित जनगणना वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपना ओर अपने परिवार की जानकारी भर कर, मोबाइल नंबर या अन्य पहचान के माध्यम पोर्टल पर लॉग इन करके जानकारी दे सकते है। एक बार स्व-गणना पूरी हो जाने पर, उपयोगकर्ता को उनके पंजीकृत मोबाइल पर एक पहचान संख्या (Identification Number) भेजी जाती है। यह सुविधा समय बचाती है और गणना की सटीकता को बढ़ाती है।
3. डेटा प्रबंधन और सुरक्षा
सारा डिजिटल डेटा एक सुरक्षित केंद्रीय सर्वर पर जमा किया जाता है, जिसका प्रबंधन रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय (ORGI) द्वारा किया जाता है।ऐप्स और पोर्टल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। किसी भी तृतीय-पक्ष को डेटा साझा नहीं किया जाता है। अपलोड किए गए डिजिटल डेटा का सत्यापन और ऑडिट सामाजिक-आर्थिक स्थिति के विभिन्न मापक पैमानों पर किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आंकड़े सही हैं।
4. डिजिटल जनगणना के लाभ
डेटा तुरंत डिजिटल रूप में अपलोड हो जाता है, जिससे डेटा प्रोसेसिंग का समय काफी कम हो जाता है और परिणाम जल्दी मिलते हैं। डिजिटल रिकॉर्डिंग से मानवीय त्रुटियों और डेटा के दोहराव की संभावना कम हो जाती है।डेटा संग्रह और प्रोसेसिंग की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो जाती है। यह जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाता है और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देता है।
कुल मिलाकर, डिजिटल जनगणना केवल तकनीक का उपयोग नहीं है, बल्कि यह बेहतर डेटा गुणवत्ता, समय की बचत और कुशल शासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह भारत की प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने और भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।