दिल्ली में पिछले दो दशकों कई बार दहली है दिल्ली…राजधानी में बड़े धमाके से सुरक्षा तंत्र पर बार-बार उठ रहे सवाल

Delhi Bomb Blast : दिल्ली एक बार फिर धमाके की दहशत से दहल उठी है. लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार को पार्किंग में खड़ी कार में हुए विस्फोट ने राजधानी में पिछले दो दशकों के उन दर्दनाक हादसों की याद ताज़ा कर दी, जब बम धमाकों ने दिल्ली को झकझोर कर रख दिया था. पिछले 20 सालों में दिल्ली में कई बड़े धमाके हुए हैं. जिसमें कुछ आतंकवादी हमले थे तो कुछ रहस्यमयी विस्फोट जिनकी वजहें कभी साफ नहीं हो सकीं.

दिल्ली में कब कब हुआ ब्लास्ट

  • 1997: लाजपत नगर ब्लास्ट

13 लोगों की मौत और 30 से अधिक घायल. यह दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में हुआ एक बड़ा विस्फोट था जिसने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे.

  • 1998: करोल बाग गैफिटी मार्केट ब्लास्ट

भीड़भाड़ वाले इलाके में हुआ यह धमाका 17 से ज़्यादा लोगों की जान ले गया.

  • 2001: संसद भवन पर हमला

संसद भवन पर आतंकियों ने गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला किया. सुरक्षा बलों सहित 9 लोगों की मौत हुई. यह देश की लोकतांत्रिक संस्था पर सबसे बड़ा आतंकी हमला माना गया.

  • 2005: दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट

दिवाली से ठीक पहले 29 अक्टूबर को सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में तीन धमाके हुए. 60 से अधिक लोगों की मौत और 200 से ज़्यादा घायल हुए.

  • 2008: दिल्ली सीरियल ब्लास्ट

13 सितंबर को कनॉट प्लेस, करोल बाग, इंडिया गेट और बाराखंभा रोड समेत कई जगहों पर हुए धमाकों में 26 लोगों की जान गई और 100 से अधिक घायल हुए. इसके कुछ महीने बाद 27 दिसंबर को महरौली में भी ब्लास्ट हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत हुई.

  • 2011: दिल्ली हाईकोर्ट ब्लास्ट

7 सितंबर को कोर्ट के गेट नंबर-5 के पास धमाका हुआ. 15 लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल हुए.

  • 2021: इजरायली दूतावास के पास मामूली धमाका

29 जनवरी को हुआ यह धमाका छोटा था, लेकिन राजनयिक क्षेत्र में होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं.

इन घटनाओं ने बार-बार यह साबित किया है कि दिल्ली आतंकियों के निशाने पर रही है. हर हादसे के बाद सुरक्षा तंत्र मजबूत करने के दावे किए गए, लेकिन हर कुछ वर्षों में किसी न किसी नए धमाके ने उन दावों की पोल खोल दी.

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