STRONG ROOM: स्ट्रॉन्ग रूम, जिसे हिंदी में वज्र गृह कहा जाता है, वह सुरक्षित कमरा है जहां मतदान के बाद EVM मशीनों को मतगणना तक संरक्षित रखा जाता है. यह वही स्थान है जहां बाद में वोटों की गिनती होती है.
मतदान से मतगणना तक की प्रक्रिया
पहले के समय में बैलट पेपर पर मतदाता वोट देते थे और पर्ची को बैलट बॉक्स में डालते थे. अब EVM का उपयोग होता है. मतदान समाप्त होने के बाद, पोलिंग पार्टी का प्रमुख सुरक्षा कर्मियों के साथ EVM मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम तक ले जाता है. मतगणना केंद्र पर एक ही स्थान पर दो, तीन या उससे अधिक विधानसभा क्षेत्रों के वोट गिने जाते हैं. प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग कमरे चिन्हित किए जाते हैं जहां उस क्षेत्र की EVM मशीनें रखी जाती हैं. मतदान की रात को ही इन कमरों को डबल सील कर दिया जाता है. ये कमरे केवल मतगणना वाले दिन सुबह रिटर्निंग अधिकारी की उपस्थिति में ही खोले जाते हैं.
स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षा का इतिहास
वज्र गृह की सुरक्षा के लिए राजनीतिक दलों की सक्रियता 1996 से शुरू हुई. इसकी पृष्ठभूमि 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी है. उस समय लालू प्रसाद यादव ने चुनाव से पहले एक रैली में कहा था कि बक्से से जिन्न निकलेगा. चुनाव काफी कड़ा रहा और ऐसा लग रहा था कि लालू यादव हार जाएंगे, लेकिन परिणाम उलट आया और उन्होंने अप्रत्याशित जीत हासिल की,
इस जीत के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मदद से स्ट्रॉन्ग रूम के सील तोड़कर बैलट बॉक्स बदल दिए गए. उस दौर में CCTV कैमरे नहीं होते थे. हालांकि इन आरोपों की कभी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने चुनाव सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत को रेखांकित किया.
राजनीतिक दलों की भागीदारी
1996 से चुनाव आयोग ने प्रमुख राजनीतिक दलों को स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए अपने सुरक्षा एजेंट नियुक्त करने की अनुमति दी. एक विधानसभा क्षेत्र के लिए अधिकतम दो एजेंट नियुक्त किए जा सकते हैं. 1996 के चुनाव में समता पार्टी और भाजपा ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर अपने एजेंट तैनात किए, जो मतगणना शुरू होने तक पहरा देते हैं. इन एजेंटों को किसी भी अनधिकृत गतिविधि की स्थिति में सवाल उठाने का अधिकार होता है. इनके अलावा नियमित सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहते हैं.
मतगणना की प्रक्रिया
मतगणना के लिए एक बड़े हॉल को काउंटिंग रूम के रूप में तैयार किया जाता है. गिनती वाले दिन सुबह सुरक्षा एजेंटों का पास निरस्त हो जाता है और मतगणना में शामिल होने के लिए नया काउंटिंग एजेंट पास जारी किया जाता है.
आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था
वर्तमान में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर CCTV कैमरे लगे होते हैं जिनसे निरंतर निगरानी की जाती है. मतगणना स्थल पर बिना पास के किसी का भी प्रवेश वर्जित है, यहां तक कि सफाई कर्मचारियों का भी नहीं, यह सख्त व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है.