बिहार चुनाव के बाद हाशिए पर चले जाएंगे नीतीश..! अटकलों को लेकर क्या है एग्जिट पोल का दावा

Bihar election 2025: बिहार में जनता दल यूनाइटेड सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है, और इसके पीछे और कोई नहीं बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का व्यक्तिगत भरोसा और विश्वसनीयता है. एक बार फिर यह साबित होने जा रहा है.

भले चुनाव से पहले जन सुराज के संस्थापक और राजद नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रति हमले करते हुए उन्हें एक्सपायरी प्रोडक्ट या भाजपा के शिकंजे में बताया और बड़ी बड़ी बाते की हो, लेकिन बिहार चुनाव की जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही हैं. सूत्रों के अनुसार मतदान के दौरान जो रुझान दिखे हैं, उन्हें नीतीश कुमार का जलवा पहले से भी बढ़ गया है. बिहार के लोगों में कुछ खास वर्गो को छोड़कर आज भी सबसे विश्वसनीय और भरोसमंद चेहरा नीतीश कुमार का ही है.

नीतीश कुमार ने बिहार के सभी वर्गो के लिए बेहतरीन काम किया लेकिन सबसे बड़ा समर्थन उन्हें महिलाओं से मिल रहा है. छात्राओं से लेकर सामान्य महिलाओं के उत्थान के लिए मुख्यमंत्री ने जो उल्लेखनीय काम किए हैं, उससे वे अत्यधिक प्रसन्न और संतुष्ट दिखाई दे रही हैं. यह महिला वोट बैंक ही है जो एक बार फिर जेडीयू को सबसे बड़ी पार्टी बनाने और नीतीश कुमार को बिहार में सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है.

चुनाव परिणाम भाजपा के लिए एक बड़ा झटका भी साबित हो सकती है, रुझान बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ इस चुनाव में गिरा है, और यहां तक की दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी चुनाव हारने जा रहे हैं. यह साफ है कि भाजपा जो चुनाव बाद नीतीश कुमार के साथ सत्ता में खेला करने की योजना बना रही थी, उस पर बिहार की जनता ने सीधे तौर पर विराम लगा दिया है. अब परिणाम ही स्पष्ट करेंगे कि भाजपा को नीतीश कुमार के सामने नतमस्तक होना पड़ेगा या नहीं.

संकेत साफ है कि मुख्यमंत्री का फैसला भाजपा या दिल्ली से नहीं बल्कि जेडीयू खुद करेंगी बिहार की जनता ने एक मजबूत संदेश दिया है, कि वह राजद और भाजपा दोनों की जातिवाद राजनीति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, बल्कि बिहार को विकास अमन चैन और रोजगार चाहिए.

14 नवंबर को आने वाले परिणाम या साबित कर देंगे कि नीतीश कुमार के सामने न भाजपा की, न चिराग पासवान की और न ही तेजस्वी यादव की दाल गलने वाली है, अगले 5 वर्षो तक बिहार की चाबी नीतीश कुमार के हाथों में रहने वाली है, और वह किसी की कृपा से नहीं बल्कि अपने व्यक्तिगत दम कम और विश्वसनीयता के बल पर फिर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.

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