Bihar election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के रुझान से यह स्पष्ट होता दिख रहा है, कि इस राजनीतिक संग्राम में सबसे बड़ा नुकसान अगर किसी का होने वाला है तो वह है राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव का, मुख्यमंत्री बनने के अत्यधिक आतुरता सार्वजनिक बयानों में अहंकार और गठबंधन की साथियों के साथ टिकट वितरण को लेकर किया गया अपमान यह वह कारक है जिन्होंने तेजस्वी को जनता से दूर कर दिया है और उनकी संभावित जीत की राह में अटकलें ला दी है.
सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी यादव और उनके परिवार को यह समझना होगा कि बिहार किसी एक परिवार की बपौती नहीं है. उनकी हम ही सब कुछ है वाली छवि ने उन्हें जनता के बीच अलोकप्रिया बना दिया है. बिहार की जनता आज भी लालू प्रसाद के शासनकाल में हुए नंगा नृत्य (अराजकता) को भुला नहीं है. लोग जातिवाद राजनीति के बजाय विकास अमन चैन और रोजगार चाहते हैं.
अगर तेजस्वी यादव राजद की पुरानी नकारात्मक छवि को नहीं बदलेंगे और पारिवारिक वर्चस्व की गंभीरता को नहीं समझेंगे तो उन्हें अपने माता-पिता की राज से लाभ कम और नुकसान अधिक होगा. वर्तमान रुझान सीधे तौर पर संकेत दे रहे हैं कि राजद की अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. इन विपरीत परिस्थितियों के बीच नीतीश कुमार का कद बिहार से लेकर राष्ट्रीय पटेल तक बढ़ता दिख रहा है. बिहार के कोने कोने से आ रहे रुझान स्पष्ट करते हैं कि भाजपा और तेजस्वी के लिए बिहार की सत्ता में फिलहाल कोई वैकेंसी नहीं है.
14 नवंबर को आने वाले परिणाम के बाद यह साबित हो जाएगी नीतीश कुमार देश की सबसे बड़ी नेताओं में से एक बनकर उभरे. अब यह तय है कि बिहार की राजनीतिक भविष्य नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द ही घूमती रहेगी.