Bihar election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में 66.9%मतदान के साथ एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। पिछले चुनाव की तुलना में 9.61%की है भारी बढ़ोतरी राजनीतिक विश्लेषकों के लिए एक महत्वपूर्ण चिह्न बन गई है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार जब भी वोटिंग में 5% से अधिक का उछाल आता है, राज्य में सत्ता का परिवर्तन होता है।
1952 से लेकर अब तक के चुनाव का विश्लेषण करें तो स्पष्ट होता है, कि मतदान प्रतिशत में मामूली बदलाव होने पर सरकार बरकरार रही है, जबकि 5% से अधिक के उतार-चढ़ाव ने हमेशा सत्ता में बदलाव लेकर आया है। 1957 में 0.64% और 1962 में 1.23% मामूली बढ़ोतरी के साथ कांग्रेस लगातार सत्ता में रही।
1967 में जो वोटिंग 7.04% बढ़कर 51.51% हुई तो कांग्रेस का दबदबा टूट गया और JKD को सत्ता मिली। 1969 में 1.28% के साथ अस्थिर सरकार रही, 1972 में कांग्रेस की सरकार में आपातकाल लगा। 1977 में आपातकाल के बाद जब मतदान 50.51% रहा (2.28% की गिरावट के साथ), तब भी सत्ता परिवर्तन हुआ। सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण 1980 का है जब वोटिंग 6.77% बढ़कर 57.28% पर पहुंची और कांग्रेस की वापसी हुई।
1990 में 5.77% की बढ़ोतरी के साथ जनता दल सत्ता में आई। 1995 से 2000 के बीच जब वोटिंग 61-62% के आसपास स्थिर रही, तो RJD की सरकार जारी रही। 2005 में हालांकि मतदान 16.1% घटकर 46.5% रहा, लेकिन यह भी एक बड़ा बदलाव था और JDU-BJP गठबंधन ने सत्ता संभाली। 2010 में फिर से 6.2% की बढ़ोतरी के साथ JDU-BJP की सरकार रिपीट हुई।2015 से 2020 में भी महज 0.38% के अंतर के साथ सत्ता में बदलाव नहीं हुआ, हालांकि गठबंधन समीकरण बदले।
14 नवंबर को चुनाव परिणाम घोषित होंगे। क्या इस बार का ऐतिहासिक पैटर्न सही साबित होगा? क्या JDU–BJP गठबंधन इस जनादेश को पलट पाएगा, या महागठबंधन की वापसी होगी? बिहार की राजनीति में एक केवल एक दिन का इंतजार बाकी है यह जानने के लिए की बिहार की जनता ने अपने आने वाले 5 साल की भविष्य को किसके हाथ में सोप है।