साइकिल से लेकर 10 हज़ार तक….नीतीश सरकार के 20 साल में महिलाओं के लिए क्या बदला

womens empowerment in bihar : बीस साल पहले जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता संभाली थी, तब राज्य की आधी आबादी यानी महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं. आधी आबादी का न तो शिक्षा में भागीदारी, न ही रोजगार में पहचान और न ही राजनीति में सक्रियता थी. लेकिन फिर 2005 के बाद से यह तस्वीर बदलनी शुरू हुई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को सशक्त बनाने को अपने शासन का केंद्रीय मिशन बना लिया. इस दौरान कई योजनाएं शुरू हुईं, जिन्होंने न सिर्फ समाजिक ढांचे को बदला, बल्कि बिहार की ग्रामीण राजनीति से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक में नई चेतना भरी. नतीजा आज जब एक बार फिर से बिहार में सरकार बनने वाली है आधी आबादी के अहम योगदान का दावा किया जा रहा है, खासकर नीतीश सरकार की. आधी आबादी के पक्ष में नीतीश कुमार ने इस बदलाव की शुरुआत की 2005 में. इस दौरान कई बड़े कार्य हुए जो महिलाओं के विकास में आज अहम भुमिका निभा रही है.

महिलाओं के शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास

नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार द्वारा 2006 में शुरू हुई मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना को बिहार में महिला सशक्तिकरण की बुनियाद माना जाता है. इस योजना के तहत नौवीं से बारहवीं तक की हर स्कूल जाने वाली बालिका को सरकार ने साइकिल दी. इस पहल का असर अभूतपूर्व रहा, ग्रामीण इलाकों में जहां लड़कियां पैदल स्कूल जाने में झिझकती थीं, अब वही साइकिल वाली बिटिया बनकर गांवों की पहचान बन गईं. स्कूलों में लड़कियों की उपस्थिति लगभग 30% से बढ़कर 70% तक पहुंच गई. इस योजना ने शिक्षा के साथ-साथ समाजिक सोच को भी झकझोरा. यह योजना इतनी सफल रही कि बाद में कई राज्यों ने इसे अपने यहां लागू किया. साइकिल योजना के बाद नीतीश सरकार ने पोशाक योजना शुरू की, जिसके तहत लड़कियों को स्कूल यूनिफॉर्म के लिए आर्थिक मदद दी गई. इस कदम से गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ और लड़कियों के स्कूल में दाखिले में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई.

राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बिहार देश का पहला राज्य बना, जिसने पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया. इस फैसले ने गांव की सत्ता में महिलाओं की नई पीढ़ी को जन्म दिया. आज हजारों महिलाएं मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्य के रूप में सक्रिय हैं. हालांकि कई जगहों पर प्रॉक्सी सिस्टम यानी पति-पत्नी राज देखने को मिला, लेकिन समाज में महिला नेतृत्व की सोच मज़बूत हुई.

महिला सुरक्षा को प्रथामिकता

नीतीश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए 181 महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर और मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना सहित कई योजनाएं शुरू कीं. इनके ज़रिए घरेलू हिंसा, उत्पीड़न या मानसिक शोषण झेल रही महिलाओं को कानूनी, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक मदद मिलने लगी.

महिलाओं के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला

2016 में नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू की. दिसको लेकर उन्होंने कहा था कि यह फैसला मैंने महिलाओं की आवाज़ पर लिया है. गांवों में इस कदम से बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला. शराबबंदी के बाद घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आई, पंचायतों में महिलाएं अब खुलकर अपनी राय रखने लगीं. हालांकि, इस फैसले के क्रियान्वयन पर सवाल भी उठे. अवैध शराब कारोबार और पुलिस की सख्ती को लेकर आलोचना होती रही, लेकिन नीयत पर किसी ने सवाल नहीं उठाया.

रोजगार में महिलाओं को अवसर

नीतीश सरकार नें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2016 में कुशल युवा प्रोग्राम शुरू किया. इस योजना के तहत लड़कियों को कंप्यूटर, अंग्रेजी और संवाद कौशल की ट्रेनिंग दी गई. इससे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ी. इसके साथ साथ नीतीश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत एक बड़ा कदम उठाया. अब इंटर पास बालिकाओं को ₹25,000 और ग्रेजुएट होने पर ₹50,000 तक की आर्थिक मदद दी जा रही है. इसका मकसद लड़कियों को शादी या पढ़ाई दोनों में आत्मनिर्भर बनाना है.

दो दशकों में नीतीश कुमार की नीतियों ने महिलाओं की स्थिति में बड़ा सामाजिक परिवर्तन किया है. लेकिन महिलाओं के विकास के लिए अभी भी काम बाकी है जैसे कि स्कूल और कॉलेजों में लड़कियों की संख्या दोगुनी हो चुकी है. लेकिन सरकारी नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी 20% से कम है. शहरी इलाकों में सोच बदली है, पर ग्रामीण इलाकों में चुनौतियां बाकी हैं. जहां 2006 में साइकिल वाली बिटिया सशक्तिकरण का प्रतीक बनी थी, वहीं आज कन्या उत्थान योजना आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा दिखा रही है. लेकिन सच्चा सशक्तिकरण तभी माना जाएगा, जब हर साइकिल वाली बिटिया आत्मनिर्भर, सुरक्षित और निर्णय लेने में पूरी तरह स्वतंत्र हो.

 

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