क्यों होती है प्राइवेट पार्ट की त्वचा गहरी? जानें लाइटर, स्मूदर और फ्लॉलेस स्किन को लेकर क्या है डॉक्टरों की राय

genital skin tone : शरीर के निजी अंगों को लेकर बातचीत आज भी अक्सर धीमे सुरों में होती है. बचपन से ही हमें परफेक्ट बॉडी की तस्वीर दिखाई जाती है. ऐसी तस्वीर जिसमें शरीर का हर हिस्सा एक जैसा, गोरा और बेदाग हो. मौजूदा समय में सोशल मीडिया, विज्ञापन और एडल्ट कंटेंट ने इस सोच को और गहरा किया है कि शरीर का हर हिस्सा एक जैसा दिखना चाहिए. लेकिन रियल में ऐसा नहीं होता है और यही वजह है कि बहुत-से लोग खासकर महिलाएं अपने शरीर के उस हिस्से को लेकर असहज महसूस करती हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा होना पूरी तरह से नैचुरल है.

क्यों गहरी होती है इस हिस्से की त्वचा

डॉक्टर बताते हैं कि शरीर के जननांगों के आस-पास की त्वचा का रंग बाकी हिस्सों की तुलना में गहरा होना आम बात है. डॉक्टरों के अनुसार शरीर के इस हिस्से का रंग हार्मोनल बदलाव, रगड़ (friction) और नैचुरल पिग्मेंटेशन की वजह से बदलता है. असली परेशानी ये है कि हम बचपन से ही एडिट की हुई तस्वीरें और फिल्टर किए गए कंटेंट देखते आए हैं, जिससे हमें अपने शरीर की एक झूठी छवि दिखती है. सोशल मीडिया और एडल्ट कंटेंट ने एक फेक आइडियल बना दिया है कि शरीर कैसा दिखना चाहिए. त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि इस हिस्से की त्वचा में मेलानोसाइट्स नाम की कोशिकाएं ज्यादा होती हैं. ये मेलानिन नामक तत्व बनाती हैं, जो त्वचा का रंग तय करता है.

क्यों होता है निजी अंगों का रंग गहरा

डॉक्टर कहते है कि हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन मेलानिन की मात्रा को प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि किशोरावस्था, गर्भावस्था या गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल से इस हिस्से का रंग गहरा दिख सकता है. इसके अलावा, टाइट कपड़े पहनने, ज्यादा चलने, एक्सरसाइज़ या यौन क्रियाओं से होने वाला घर्षण भी हल्की जलन पैदा करता है, जिससे त्वचा और रंगत बनाती है. ये पूरी तरह से सामान्य और नेचुरल प्रक्रिया है, इसका गंदगी या बीमारी से कोई संबंध नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया और एडल्ट इंडस्ट्री ने शरीर की वास्तविकता को विकृत कर दिया है. फिल्टर, एडिट की गई तस्वीरें और कॉस्मेटिक सर्जरी की तस्वीरें यह भ्रम फैलाती हैं कि हर शरीर गोरा, स्मूद और एक जैसा होना चाहिए. लेकिन असलियत यह है कि हर इंसान का शरीर अलग है. यह विविधता ही प्राकृतिक सुंदरता की पहचान है.

लाइटर, स्मूदर और फ्लॉलेस त्वचा को लेकर क्या कहते डॉक्टर

इसको लेकर बाजार में इन दिनों इंटिमेट एरिया लाइटनिंग या व्हाइटनिंग क्रीम्स का चलन बढ़ गया है. जिसे कई कंपनियां इन्हें सुंदरता बढ़ाने के नाम पर बेचती हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे बेहद खतरनाक मानते हैं. डॉक्टरों के अनुसार जननांग क्षेत्र की त्वचा बेहद नाजुक होती है. व्हाइटनिंग क्रीम्स में मौजूद केमिकल्स से जलन, लालिमा, पतलापन और यहां तक कि स्थायी नुकसान भी हो सकता है. कुछ क्रीम तो त्वचा की सुरक्षा परत को ही कमजोर कर देती हैं, जिससे इंफेक्शन या स्कार्स बन सकते हैं. डॉक्टर सलाह देते हुए कहते हैं कि इस क्षेत्र की साफ-सफाई रखें, लेकिन ओवर-क्लीनिंग से बचें. कॉटन के कपड़े पहनें ताकि हवा का प्रवाह बना रहे. अगर खुजली, जलन या असामान्य काला पड़ना दिखे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें.

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