lung cancer : देश और दुनिया में फेफड़ों का कैंसर लगातार बढ़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह ऐसा कैंसर है जिसमें शुरुआती लक्षण बहुत मामूली होते हैं और अक्सर लोग उन्हें सामान्य खांसी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी तेजी से फैल चुकी होती है।
धूम्रपान अब भी सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। परोक्ष धूम्रपान, वायु प्रदूषण, रसायनों के संपर्क और अनुवांशिक कारण भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाते हैं। लेकिन कई ऐसे लक्षण हैं जिन्हें लोग देर से पहचानते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि जिन मरीजों में बाद में कैंसर की पुष्टि हुई, इसमें सामान्यतः ये शिकायत देखी गईं. जिसमें कई हफ्तों तक लगातार खांसी, खांसी में खून आना, थोड़ी सी गतिविधि में भी सांस फूलना, छाती में दर्द, वजन तेजी से कम होना और बार-बार फेफड़ों के इन्फेक्शन होना वो कारण हैं जिससे फेफड़ों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. कई मामलों में CT स्कैन में मांस दिखाई देता है, जो ट्यूमर का संकेत हो सकता है। इसके बाद बायोप्सी के जरिए कैंसर की पुष्टि की जाती है।
दो तरह का होता है कैंसर
फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. पहला हैं नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC). यह लगभग 80–85% मामले में देखा जाता है. दुसरा है स्मॉल सेल लंग कैंसर (SCLC) यह तेजी से फैलता है. कैंसर की स्टेज और प्रकार के आधार पर सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे आधुनिक उपचार अपनाए जाते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि धूम्रपान न करना और समय-समय पर फेफड़ों की जांच करवाना इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। विशेष रूप से वे लोग जो धूम्रपान करते हैं या पहले कर चुके हैं, उन्हें लगातार खांसी या सांस संबंधी दिक्कतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।