India China dispute : भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर तकरार एक बार फिर सामने है. चीन लगातार इस क्षेत्र को भारत का हिस्सा मानने से इंकार करता है और इसे दक्षिण तिब्बत बताकर अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता है. वहीं भारत साफ कहता है कि अरुणाचल प्रदेश ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक तौर पर भारत का अभिन्न राज्य है.
चीन अरुणाचल पर क्यों दावा करता है?
चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से तिब्बत का भाग रहा है, इसलिए वह इसे South Tibet कहकर अपना अधिकार जताता है. यही कारण है कि चीन कई बार अरुणाचल में जन्मे भारतीय नागरिकों के दस्तावेज तक मानने से इनकार कर देता है. भारत इस दावे को पूरी तरह गलत और निराधार बताता है. भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारतीय प्रशासन, चुनाव, विधान और सांस्कृतिक ढांचे का हिस्सा रहा है तथा यहां रहने वाली जनजातियां भी भारतीय पहचान से जुड़ी हैं.
क्या है भारत-चीन का LAC विवाद
भारत और चीन के बीच 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) है, लेकिन यह रेखा स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है. कई जगह भारत अपनी सीमा आगे मानता है तो वहीं चीन अलग दावा पेश करता है. इस अस्पष्टता के कारण अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख क्षेत्रों में अक्सर चीनी सैनिकों की घुसपैठ, गश्ती दलों के बीच तनाव, झड़प जैसी स्थितियां उत्पन्न होती रहती हैं. पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई गांवों, पहाड़ों और नदियों के नाम बदलकर चीनी भाषा में नए मानचित्र जारी किए. हालांकि भारत ने हर बार इस कार्रवाई को बेवजह और अवैध बताते हुए खारिज किया है. चीन का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका 90,000 वर्ग किमी क्षेत्र है. वहीं भारत का आरोप है कि चीन ने पश्चिम में अक्साई चिन के 38,000 वर्ग किमी क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है.
1914 का शिमला समझौता और मैकमोहन रेखा
भारत-चीन सीमा विवाद की जड़ 1914 के शिमला समझौते से शुरू होती है. इस बैठक में ब्रिटिश भारत, तिब्बत और चीन के प्रतिनिधियों ने सीमा तय करने की कोशिश की और मैकमोहन लाइन बनाई गई. लेकिन चीन ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी. चीन कहता है कि तिब्बत स्वतंत्र देश नहीं था, इसलिए वह किसी सीमा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता. भारत का कहना है कि तिब्बत उस समय एक स्वतंत्र इकाई था और सीमा रेखा वैध है. 1950 में चीन ने तिब्बत पर पूरी तरह कब्जा कर लिया, उसके बाद विवाद और गहरा गया.जानकारी के लिए बता दें कि भारत-चीन सीमा को तीन सेक्टरों में बांटा गया है.
- पश्चिमी सेक्टर – जम्मू-कश्मीर (अक्साई चिन, जिस पर चीन कब्जा किए हुए है)
- मिडिल सेक्टर – हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड
- पूर्वी सेक्टर – सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश (जिसे चीन दक्षिण तिब्बत बताता है)
भारत का कहना है कि चीन पश्चिमी सेक्टर में अक्साई चिन पर अवैध कब्जा किए हुए है, जबकि चीन पूर्वी सेक्टर यानी अरुणाचल पर दावा करता है. चीन मैकमोहन लाइन को मानने से इनकार करता है और अरुणाचल प्रदेश को नक्शों में अपना क्षेत्र दिखाता है. भारत कहता है कि अरुणाचल प्रदेश न सिर्फ एक भारतीय राज्य है, बल्कि वहां प्रशासन, चुनाव, विधान और सांस्कृतिक व्यवस्था शुरू से भारतीय ढांचे का ही हिस्सा है LAC की अस्पष्टता और ऐतिहासिक दावों की वजह से सीमा विवाद लगातार बना हुआ है और समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ाता रहता है.