Violence Against Women : दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार 2024 में महिलाओं के लिए उनका अपना घर ही सबसे खतरनाक जगह में से एक है. नंबर्स बताते हैं कि हर दिन कम से कम 137 महिलाओं और लड़कियों की हत्या उनके ही परिवार वाले या पार्टनर्स ने की है. साल भर में कुल 50000 लकड़ियों के साथ ऐसा हुआ जब उसके किसी अपने ने ही मौत के हवाले कर दिया.
हर 10 मिनट में एक की मौत
यूएन द्वारा जारी किए वैश्विक डेटा के हिसाब से इस साल कुल 83000 महिलाओ और लड़कियों की हत्या हुई, जिसमें बताया गए नंबर्स का मतलब ये है कि हर 10 मिनट में किसी महिला या लड़की को उनके परिवार या पार्टनर ने मार डाला.यह नंबर न सिर्फ चिंता करने लायक है, बल्कि यह बताता है कि बाहर खुद के सुरक्षा को लेकर परेशान रहने वाली महिला और उसका परिवार यह भूलते जा रहे की उनकी बेटी-बहन घर के भीतर भी असुरक्षित है.
एशिया और अफ्रीका नहीं सुरक्षित है लड़कियां !
अगर सिर्फ एशिया देशों की बात की जाए तो सबसे ज्यादा 17500 से अधिक हत्याएं दर्ज की गई. पहले नंबर पर अफ्रीकी देश हैं जहां यह संख्या लगभग 22500 तक पहुंच गई. जानकार बताते हैं कि एशिया और अफ्रीका दोनों महाद्वीपों में सामाजिक संरचना(social structure) लैंगिक असमानता (Gender inequality) और घरेलू हिंसा (domestic violence) से जुड़े मुद्दे गहराई से जमे हुए हैं यही बजह है कि ऐसी घटनाओं की संख्या इन जगहों पर लगातार बढ़ती जारही है.
पीड़ितों में पुरुष नंबर वन
रिपोर्ट्स यह भी बताती है कि पुरुषों की कुल हत्याओं की संख्या महिलाओं से कहीं अधिक है लेकिन यह महत्वपूर्ण अंतर है कि पुरुषों की हत्या करने वालों में उनके परिवार या पार्टनर की भूमिका बेहद कम पाई गई है. वहीं इसके उल्टा महिलाओं के मामलों में स्थिति बिल्कुल उल्टी है. करीब 60% महिलाओं की हत्या उनके परिवार वाले या पार्टनर ने की जबकि पुरुषों के मामलों में या आंकड़ा केवल 11.2% है. यूएन की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2023 की तुलना में 2024 के आंकड़े थोड़े काम जरूर दिखते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं की हत्याएं कम हुई है. कई देशों ने इस वर्ष अपना डाटा प्रजेंट नहीं किया है जिसके कारण वैश्विक नंबर में गिरावट दिखाई दे रही है. रिपोर्ट्स यह भी बताती है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने के प्रयासों में प्रभावी प्रगति दिखाई नहीं दे रही है.