Ganga Ghats Siberian birds : राजधानी पटना के गंगा दियारा क्षेत्र में इन दिनों विदेशी प्रवासी पक्षियों का अनोखा मेला लग गया है। साइबेरिया, यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर यह पक्षी बिहार पहुंच चुके हैं। हर साल की तरह इस बार भी दियारा इलाक़े के शांत, खुले और सुरक्षित पर्यावरण ने इन्हें आकर्षित किया है।
ठंड बढ़ते ही दिखने लगे दर्जनों विदेशी प्रजाति के पक्षी
पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नवंबर के पहले सप्ताह से ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया था। दिसंबर के शुरुआती दिनों तक यह संख्या कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल दियारा और उसके आसपास 60 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों को देखा जा रहा है। इनमें पिंटेल, गडवाल, रेडस्टार्ट, ब्लू-रॉक थ्रश, वागटेल, मार्श सैंडपाइपर, रूफस-टेल्ड रॉबिन समेत कई दुर्लभ पक्षी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पक्षी यहां जनवरी के अंत तक रहेंगे और फरवरी में मौसम बदलने के साथ लौटना शुरू करेंगे।
बिहार क्यों है इनका पसंदीदा ठिकाना?
पक्षी विशेषज्ञ बताते हैं कि बिहार के दियारा इलाके प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग जैसे माने जाते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं. जिसमें मुख्य रूप गंगा के फैले तटबंधों पर भरपूर भोजन, खुले और शांत जल क्षेत्र, कम दूरी पर सुरक्षित विश्राम का स्थान , मानव गतिविधियों की कमी और प्रशासन द्वारा शिकार पर सख्त निगरानी. उनके मुताबिक, अकेले पटना के दियारा क्षेत्र में हर साल लगभग 3,000 से 4,000 तक प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है। पूरे बिहार में यह संख्या 15,000 से अधिक होती है।
बर्ड वॉचर्स के लिए स्वर्ग बना पटना दियारा
इन दिनों सुबह-सुबह गंगा घाटों और दियारा के किनारों पर बर्ड वॉचर्स की सक्रियता बढ़ गई है। दूरबीन, कैमरा और नोटबुक लिए दर्जनों बर्ड लवर विदेशी परिंदों की गतिविधियां कैद कर रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय के बर्ड रीसर्च ग्रुप ने भी विशेष सर्वे शुरू किया है। शोधकर्ताओं की टीम के अनुसार, इस बार कुछ नई प्रजातियां भी दर्ज की गई हैं, जो पहले यहां नहीं दिखती थीं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा लाभ
प्रवासी पक्षियों की वजह से दियारा इलाक़ों में पर्यटकों की संख्या बढ़ गई है। नाविकों, स्थानीय गाइडों और छोटे व्यापारियों की अच्छी कमाई हो रही है। बिहार सरकार ने भी बर्ड वॉचिंग टूर की योजना पर काम शुरू किया है, ताकि पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने दियारा क्षेत्र में विशेष पेट्रोलिंग शुरू की है। शिकारियों पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। कुछ संवेदनशील इलाकों को नो-इंट्री ज़ोन घोषित किया गया है, ताकि पक्षियों को किसी तरह की परेशानी न हो। कुल मिलाकर, शरद और शीत ऋतु एक बार फिर पटना को विदेशी परिंदों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रही है। अगले दो महीने तक गंगा किनारे प्रकृति का यह नज़ारा अपने चरम पर रहेगा।