Memories of relationships : सोशल मीडिया और डिजिटल यादों के इस दौर में पुराने रिश्तों की तस्वीरें मोबाइल और लैपटॉप में सहेज कर रखना आम बात हो गई है. लेकिन क्या ये तस्वीरें मानसिक शांति देती हैं या भावनात्मक बेचैनी बढ़ाती हैं? इन दिनों यह सवाल काफी चर्चा में जिसको लेकर बहस किया जा रहा है. लेकिन क्या अपने सभी पुराने रिश्तों (एक्स पार्टनर्स) की तस्वीरें डिलीट करने के फैसला सही है ? अगर हां तो क्या है इसके मनोवैज्ञानिक कारण.
बीते समय की टाइम मशीन होती है तस्वीरें
तस्वीरें केवल यादें नहीं होतीं, बल्कि वे हमें बार-बार मानसिक रूप से उस दौर में लौटा ले जाती हैं. जब कोई व्यक्ति अपने एक्स पार्टनर की तस्वीर देखता है, तो उसके साथ जुड़ी भावनाएं ,प्यार, गुस्सा, दर्द या पछतावा फिर से लौट सकती. इस वजह से व्यक्ति वर्तमान में रहते हुए भी अतीत में उलझा रह जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रेकअप के बाद एक्स की तस्वीरें देखना मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है. इससे अवसाद (डिप्रेशन), गुस्सा और निराशा के साथ साथ अकेलापन और भावनात्मक अस्थिरता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. कई बार लोग यह सोचते हैं कि अब उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन तस्वीरें देखने के बाद अचानक भावनात्मक प्रतिक्रिया सामने आ जाती है.
तस्वीरें रखना ही नहीं, कभी-कभी डिलीट करना भी ज़रूरी
तस्वीरें डिलीट करना अतीत को नकारना नहीं होता, बल्कि यह इस बात का संकेत हो सकता है कि व्यक्ति अब मानसिक रूप से आगे बढ़ चुका है. भारतीय दर्शन में इसे वैराग्य कहा जाता है यानी उन चीज़ों को छोड़ देना, जिनका जीवन में अब कोई उद्देश्य नहीं रह गया. इसके साथ साथ एक अहम मनोवैज्ञानिक पहलू ये है कि अगर कोई व्यक्ति एक्स की तस्वीरें देखकर कुछ भी महसूस नहीं करता, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह उबर चुका है. यह भावनात्मक सुन्नता (Emotional Numbness) भी हो सकती है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं मानी जाती.
क्या हर किसी को तस्वीरें डिलीट कर देनी चाहिए?
हर तस्वीर जरूरी नहीं है लेकिन कौन सा तस्वीर रखना है और कौन नहीं. हर व्यक्ति को अपने हालात और भावनाओं के अनुसार फैसला लेना चाहिए. अगर तस्वीरें बार-बार भावनात्मक तनाव (Emotional stress) देती हैं, नई जिंदगी या नए रिश्ते में रुकावट बनती हैं तो उन्हें हटाना बेहतर हो सकता है. लेकिन अगर वे सिर्फ एक बीते दौर की सामान्य याद बनकर रह गई हैं, तो उन्हें रखना भी गलत नहीं है.
सोशल मीडिया के दौर में क्या है मामला
आज के समय में तस्वीरें केवल फोन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया प्रोफाइल, क्लाउड स्टोरेज और डिजिटल बैकअप में भी हमेशा मौजूद रहती हैं. ऐसे में पुराने रिश्तों से पूरी तरह आगे बढ़ पाना और भी मुश्किल हो गया है. लेख में यह भी कहा गया है कि डिजिटल डिटॉक्स और भावनात्मक डिटॉक्स, दोनों अब ज़रूरी हो गए हैं.एक्स पार्टनर की तस्वीरें डिलीट करना या न करना पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है, लेकिन यह जरूर समझना जरूरी है कि ये तस्वीरें आपके मन और भावनाओं पर क्या असर डाल रही हैं. अगर वे आपको बार-बार अतीत में खींच रही हैं और वर्तमान की खुशियों से दूर कर रही हैं, तो उन्हें छोड़ना ही बेहतर हो सकता है.