Putin India Visit : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के आधिकारिक दौरे पर राजधानी नई दिल्ली पहुंचे हैं. इस दौरे के दौरान वे 23वां भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. यह वार्षिक शिखर बैठक भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. आमतौर पर यह समिट दिसंबर में आयोजित होती है और इसकी मेजबानी दोनों देश बारी-बारी से करते हैं.
रक्षा सौदों पर अहम बातचीत
इस बार के शिखर सम्मेलन में रक्षा क्षेत्र को लेकर बड़े फैसले होने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक, भारत में पहले से तैनात S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की आगे की सप्लाई, तकनीकी सहयोग और रखरखाव पर चर्चा होगी. इसके साथ ही अत्याधुनिक Su-57 फाइटर जेट को लेकर संभावित डील और तकनीकी साझेदारी पर भी मंथन होने की उम्मीद है.
ऊर्जा सेक्टर में सहयोग को मिलेगी रफ्तार
तेल और गैस सप्लाई बढ़ाने, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत होगी. भारत रूस से कच्चे तेल के आयात को और बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है, वहीं न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में नए रिएक्टर प्रोजेक्ट्स और तकनीकी सहयोग के प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं.
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और रूस ने आपसी द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इस यात्रा के दौरान व्यापार घाटे को कम करने पर खास फोकस रहेगा. भारत की ओर से दवाइयों, ऑटोमोबाइल, कृषि उत्पादों और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के प्रयास तेज किए जाएंगे. इससे भारतीय कारोबारियों को रूस में बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है, जो रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होगा.
कई अहम समझौते और एमओयू संभावित
शिपिंग, स्वास्थ्य सेवाएं, उर्वरक, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते और एमओयू साइन होने की संभावना है. इसके अलावा जन-जन के बीच संबंधों, मोबिलिटी पार्टनरशिप, संस्कृति और वैज्ञानिक सहयोग के क्षेत्र में भी नए समझौतों के जरिए रिश्तों को और गहराई देने की तैयारी है.
आर्थिक सहयोग को मिलेगी नई मजबूती
राष्ट्रपति पुतिन एक बड़े व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचे हैं. इससे दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान और संयुक्त परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत-रूस संबंधों को केवल रणनीतिक ही नहीं बल्कि आर्थिक स्तर पर भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा. कुल मिलाकर, यह शिखर सम्मेलन भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और संस्कृति जैसे तमाम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव साबित हो सकता है.