Bihar Politics : बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में तेजस्वी ने आरजेडी के कमजोर प्रदर्शन पर विस्तार से बात करते हुए चुनावी प्रक्रिया, सरकारी मशीनरी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए।
लोकतंत्र की हार हुई है, मशीनरी जीती है
तेजस्वी यादव ने कहा कि 2025 का चुनाव महागठबंधन की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार है। उनके मुताबिक चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ। भाजपा ने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए। तेजस्वी ने साफ कहा कि आंकड़े जो भी हों, लेकिन जनता बदलाव चाहती थी, फिर भी नतीजे उम्मीदों के उलट आए।
आरजेडी की सीटें 75 से 25 कैसे हुईं?
2020 में आरजेडी को 75 सीटें मिली थीं, जबकि 2025 में पार्टी महज 25 सीटों पर सिमट गई। इस सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने पूरे बिहार में घूमकर चुनाव अभियान चलाया। जनता दवाई, कमाई, पढ़ाई और सुनवाई वाली नई सरकार चाहती थी। इसके बावजूद नतीजे वह नहीं आए, जिनकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि एक शब्द में कहूं तो लोकतंत्र हारा है और मशीनरी जीती है। भाजपा ने हमारी योजनाओं को अपने नाम पर लागू किया.
तेजस्वी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि माई-बहन मान योजना, पेंशन योजना और फ्री बिजली योजना जैसी कई योजनाएँ, जिन्हें उन्होंने आरजेडी के विजन का हिस्सा बताया, चुनावी लाभ के लिए एनडीए सरकार ने अपने नाम पर लागू कर दीं।
आचार संहिता से पहले 40,000 करोड़ बांटी गई: तेजस्वी
आरजेडी नेता ने दावा किया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के 10 दिन पहले महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए गए। विभिन्न योजनाओं के तहत पूरे बिहार में करीब 40 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए।
किसानों को भी कई लाभार्थी योजनाओं के तहत पैसे दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान के दिन भी महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं के खाते में राशि भेजी गई। तेजस्वी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया। वोट शेयर बढ़ा, 32 लाख ज्यादा वोट मिले ,हालांकि सीटों में बड़ी गिरावट आई, लेकिन तेजस्वी ने दावा किया कि पार्टी के वोट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आरजेडी को इस बार 32 लाख अधिक वोट मिले। उनके अनुसार बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत बताता है कि जनता बदलाव चाहती थी। तेजस्वी ने कहा कि नतीजों से सिर्फ जनता ही नहीं, बल्कि कई भाजपा और जेडीयू के विजयी विधायक भी हैरान हैं।