Journalist Protection Bill : देश में लंबे कार्य घंटे विशेषकर 70 घंटे काम जैसे प्रस्ताव को लेकर चल रही बहस के बीच लोकसभा में शुक्रवार को कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया गया। यह बिल कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाहर काम से जुड़े कॉल, ईमेल और मैसेज का जवाब न देने का कानूनी (Right to Disconnect Bill) अधिकार देने की बात करता है। इसके अलावा महिलाओं के मेंसुरेशन राइट्स और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े बिल भी सदन में रखे गए।
क्या है राइट टू डिस्कनेक्ट बिल
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले द्वारा पेश किए गए ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025’ में कर्मचारियों के लिए एक वेलफेयर अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी संगठन अपने कर्मचारियों से ऑफिस समय के बाद काम न करवाए। कर्मचारी को ऑफिस आवर्स के बाद काम से जुड़े फोन कॉल, ईमेल या मैसेज का जवाब न देने का पूर्ण अधिकार होगा। छुट्टियों के दौरान भी किसी प्रकार की वर्क कम्युनिकेशन का जवाब देना अनिवार्य नहीं होगा। अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती है, तो उस पर कर्मचारियों के कुल वेतन (Total Remuneration) का 1% जुर्माना लगाया जा सकेगा।
मेनसुरेशन से जुड़े दो महत्वपूर्ण बिल भी पेश
सदन में महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े दो अलग-अलग प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश हुए।
- मेंस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल, 2024
कांग्रेस सांसद कडियम काव्या द्वारा पेश इस बिल में कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए मेंसुरेशन के दौरान विशेष सुविधाएं, आवश्यक मेडिकल सहायता और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- पेड पीरियड लीव का प्रस्ताव
लोजपा सांसद शंभवी चौधरी ने एक अलग बिल पेश करते हुए कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पेड पीरियड लीव,हाइजीन सुविधाएं और मेंसुरेशन से जुड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं कानूनी रूप से अनिवार्य करने की मांग की है। ये दोनों प्रस्ताव देश में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुविधाओं और स्वास्थ्य से जुड़ी बहस को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन बिल पेश
स्वतंत्र सांसद विशालदादा प्रकाशबापू पाटिल ने जर्नलिस्ट (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड प्रोटेक्शन) बिल, 2024 पेश किया। इसमें पत्रकारों पर होने वाली हिंसा को रोकने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी निजी तथा प्रोफेशनल संपत्ति की रक्षा के प्रावधान शामिल हैं। बिल में पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान सुरक्षा देने और हमलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव है।
प्राइवेट मेंबर बिल का क्या होता है?
संसद में सांसदों को ऐसे मुद्दों पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने का अधिकार है जिन पर वे मानते हैं कि सरकार को कानून बनाना चाहिए। हालांकि अधिकतर मामलों में सरकार अपनी राय देने के बाद ये बिल वापस ले लिए जाते हैं और बहुत कम प्राइवेट मेंबर बिल वास्तव में कानून बन पाते हैं। फिर भी, ऐसे बिल समाज और नीति-निर्माण में नए मुद्दे उठाने और बहस पैदा करने का अहम माध्यम माने जाते हैं।