Vande Mataram debate : भारत की स्वतंत्रता की पूर्वसंध्या पर 14 अगस्त 1947 को जब संविधान सभा की पहली ऐतिहासिक बैठक शुरू हुई, तो पूरा सभागार एक स्वर में वंदे मातरम् गूंज उठा. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत वर्षों से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा रहा है। वंदे मातरम् 1882 में प्रकाशित उपन्यास आनंदमठ से लिया गया था। बाद में यह गीत जनांदोलन का प्रेरक बना और अंग्रेजी शासन के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक भी।
कब-कब मिली आधिकारिक मान्यता
बंगाल के लोकप्रिय लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर यह रचना की थी. जिसे बाद भारत के राष्ट्रगीत का सम्मान मिला. बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ के एक हिस्से के रूप में 1882 में पहली बार पत्रिका बंगदर्शन यह गीत प्रकाशित हुआ था. इसके बाद 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच से पहली बार सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर वंदे मातरम् गया . इसके बाद 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। गीत को लेकर वर्षों से चला आ रहा सम्मान आज भी बरकरार है क्योंकि इसमें भारतभूमि का रूपकात्मक वर्णन है, जो मातृभूमि को प्रकृति, संस्कृति और शक्ति के स्वरूप में प्रस्तुत करता है।
स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक
वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान युवाओं, क्रांतिकारियों और आम भारतीयों में ऊर्जा भरी। यह गीत ब्रिटिश शासन के विरोध में एकजुटता का नारा बन गया। इसके दो शब्द वंदे मातरम् ने लाखों देशवासियों को एक भावनात्मक सूत्र में बांध दिया। आजादी के 75 साल बाद भी आज यह गीत राष्ट्रभक्ति के उच्चतम स्वरूप का प्रतीक है और राष्ट्रगान जन-गण-मन के साथ समान भाव से सम्मान प्राप्त करता है।
गीत का मूल स्वरूप और भावार्थ
मूल संस्कृत गीत में भारत को सुजलाम, सुफलाम, मलयज-शीतलाम यानी जल, फल, पवन और शीतलता से भरपूर भूमि के रूप में चित्रित किया गया है। गीत के आगे के अंशों में देश की नदियों, खेतों, वनस्पतियों और प्रकृति की समृद्धि का बखान किया गया है। लेखक भारतमाता को विज्ञान, शक्ति, भक्ति और विद्या की मूर्ति बताते हैं। दार्शनिक श्रीअरविंदो द्वारा किया गया भावानुवाद गीत की गहन आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक महत्त्व को सामने रखता है। वे इसे मातृशक्ति का स्तवन बताते हैं जो संकट में रक्षा करती है, समृद्धि देती है और ज्ञान का प्रकाश फैलाती है।
- मूल गीत
वंदे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम,
शस्य श्यामलां मातरम्!
वंदे मातरम्!शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुवसितां सुमधुर भारिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम्!
वंदे मातरम्!मूल गीत आगे इस तरह है—
कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद काराल,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केनो मां एतो बले,
बहुबल धारिणीं, नमामि तारिणीं,
रिपुदलवारीणि मातरम्!
वंदे मातरम्!त्वंहि विद्या, तुम्हि धर्म, तुम्हि हृदि
त्वंहि मर्म,
त्वंहि प्राणा: शरीर,
या देवी त्वंहि मां शक्ति,
हृदये तुम्हि मां भक्ति,
तोमारि प्रतिमा गाढ़ि,
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्!
वंदे मातरम्!त्वंहि दुर्गा दशप्रहरण धारणि
कमला कमलदलविहारिणि
वाणी विद्यादायिनि
नमामि त्वां, नमामि कमलाम
अमलां अतुलाम, सुजलां सुफलां
मातरम्!
वंदे मातरम्!श्यामलां सरलां सुसितां भूषिताम्
धरणीं मृदणीं मातरम्!
वंदे मातरम्।