Kashmir of kerala : धरती के स्वर्ग की बात आते ही जम्मू-कश्मीर का नाम सबसे पहले याद आता है, लेकिन दक्षिण भारत में भी एक ऐसी जगह है जिसकी खूबसूरती लोगों को कश्मीर की याद दिला देती है। मुन्नार से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित कंथलूर एक शांत, हरा-भरा और रहस्यमय हिल स्टेशन है, जिसे उसकी ठंडी जलवायु, सेब के बगीचे, प्राकृतिक चंदन के जंगल और अनोखी जीवन शैली के कारण केरल का कश्मीर कहा जाता है।
1962 से चल रहा है अनोखा बार्टर सिस्टम
कंथलूर की सबसे बड़ी खासियत है यहां का अनोखा बार्टर सिस्टम, जो 1962 से आज तक बिना रुके चल रहा है। गांव की एक विशेष दुकान पर स्थानीय लोग लहसुन, अदरक, धनिया, सरसों, बीन्स जैसी फसलों को लाते हैं और बदले में चावल व अन्य जरूरत का सामान ले जाते हैं। करीब 160 परिवार इस परंपरा पर निर्भर हैं। आधुनिक दौर में भी यह पुरानी व्यवस्था लोगों की आपसी जुड़ाव और भरोसे को दर्शाती है।
12 साल में एक बार नीली हो जाती है घाटी
कंथलूर का दूसरा बड़ा आकर्षण है नीलकुरिंजी,एक दुर्लभ फूल जो हर 12 साल में खिलता है। इसके फूलने पर पूरी घाटी नीले रंग की चादर जैसी दिखने लगती है। 2018 में आखिरी बार ये फूल खिले थे, और पर्यटकों को अगली बार यह नजारा 2030 में देखने को मिलेगा। इस अद्भुत दृश्य को देखने देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
प्राकृतिक रूप से उगते हैं चंदन के जंगल
कंथलूर और इसके पड़ोसी इलाके मरयूर को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि यह केरल का इकलौता क्षेत्र है जहां चंदन के पेड़ प्राकृतिक रूप से उगते हैं। यहां की हवा में हमेशा चंदन और मिट्टी की भीनी खुशबू रहती है। स्थानीय लोग चंदन के तेल को लिक्विड गोल्ड भी कहते हैं, क्योंकि यह बेहद कीमती माना जाता है।
कब जाएं कंथलूर?
कंथलूर घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और सुहावना होता है, जिससे यह जगह दक्षिण भारत की गर्मी से राहत चाहने वाले यात्रियों के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बन जाती है।कुल मिलाकर, कंथलूर न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना है, बल्कि परंपरा, संस्कृति और अनोखे अनुभवों का मेल भी है,ठीक उसी तरह, जैसे कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है।