Bihar news : बिहार में सवर्ण वर्ग में आने वाली भूमिहार जाति के नाम के आगे ‘ब्राह्मण’ शब्द जोड़े जाने की मांग को लेकर सियासत गरमा गई है। भूमिहार संगठनों ने सरकारी दस्तावेजों में जाति का नाम भूमिहार-ब्राह्मण दर्ज करने की मांग की है। इस मुद्दे पर राज्य सवर्ण आयोग में एकराय नहीं बन पाई है, जिसके बाद आयोग ने गेंद नीतीश सरकार के पाले में डाल दी है। अब इस पर राज्य सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या है मामला
मीडिया सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य सवर्ण आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा था कि सरकारी दस्तावेजों में समुदाय का नाम भूमिहार लिखा जाए या भूमिहार ब्राह्मण। इस मुद्दे पर बीते एक महीने में आयोग की तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। दावा किया जा रहा है कि आयोग के कुछ सदस्य भूमिहार के आगे ‘ब्राह्मण’ जोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, सवर्ण आयोग के चेयरमैन महाचंद्र प्रसाद सिंह ने किसी भी तरह के विवाद से इनकार किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि हर समाज में समय-समय पर इस तरह के प्रश्न उठते रहते हैं और इस मामले में 1931 की जनगणना के सरकारी रिकॉर्ड को आधार बनाकर फैसला लिया जाएगा। वहीं, आयोग के कुछ सदस्यों का मानना है कि किसी जाति को किस नाम से पहचाना जाना चाहिए, यह उस समुदाय का विशेषाधिकार है, लेकिन ऐसे विवादित विषयों को आयोग के स्तर पर लाना उचित नहीं है।
क्यों हो रहा विवाद
बताया जा रहा है कि 1931 की जनगणना में भूमिहार जाति को भूमिहार-ब्राह्मण के रूप में दर्ज किया गया था। इसके अलावा बिहार में लंबे समय तक जमीन के खातियान और अन्य भू-राजस्व दस्तावेजों में भी भूमिहार-ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल होता रहा। हालांकि, 2023 में हुई जाति आधारित गणना में इस जाति को केवल भूमिहार के रूप में दर्ज किया गया, जिस पर कई भूमिहार संगठनों ने आपत्ति जताई। संगठनों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में जाति के नाम को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होने से जमीन के मालिकाना हक पर असर पड़ सकता है। इसी को लेकर राष्ट्रीय भूमिहार ब्राह्मण परिषद ने हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मांग की है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तैयार की गई जातियों की सूची में भूमिहार ब्राह्मण नाम को शामिल किया जाए।
नीतीश सरकार के फैसले पर लगेगी अंतीम मुहर
परिषद के सचिव केशव कुमार ने आरोप लगाया कि बिना समुचित जांच के बनाई गई सूची में इस जाति का नाम छोड़े जाने से भू-राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने अंचल कार्यालयों में संरक्षित भूमि रिकॉर्ड में जाति का नाम बदलने पर रोक लगाने की भी मांग की है। इस बीच, ऑल बिहार ब्राह्मण फेडरेशन के अध्यक्ष और रिटायर्ड आईपीएस एसके झा ने कहा कि परंपरागत रूप से भूमिहारों को भूमिहार-ब्राह्मण कहा जाता रहा है और इस मुद्दे पर भूमिहारों व ब्राह्मणों के बीच कोई विवाद नहीं है। वहीं, दरभंगा से जुड़े ब्राह्मण फेडरेशन के सदस्य डॉ. उद्भत्त मिश्रा ने कहा कि भूमिहार के आगे ब्राह्मण शब्द जोड़ने से ब्राह्मण समाज की सांस्कृतिक एकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अब जब सवर्ण आयोग इस मुद्दे पर अंतिम फैसला नहीं ले पाया है, तो सबकी नजरें नीतीश सरकार पर टिकी हैं कि वह ऐतिहासिक रिकॉर्ड, सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय लेती है।