VB–G Ram G Bill 2025 : केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, जिसे VB–G Ram G Bill 2025 कहा जा रहा है, गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में सरकार की ओर से बिल पर जवाब दिया। विपक्ष के तीखे विरोध और भारी हंगामे के बीच यह बिल ध्वनि मत से पास हुआ। यह कानून करीब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा।
सदन में हंगामा विपक्ष का विरोध
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। कई सांसद वेल में पहुंच गए और कागज उछाले। इससे पहले विपक्ष ने संसद परिसर में इस बिल के विरोध में मार्च भी निकाला, जिसमें 50 से अधिक सांसदों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान VB–G Ram G बिल वापस लो के नारे लगाए गए।
14 घंटे लंबी चर्चा
बुधवार को लोकसभा में इस बिल पर लगातार 14 घंटे चर्चा हुई। कार्यवाही देर रात 1:35 बजे तक चली। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 98 सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया। सरकार ने इसे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा सुधार बताते हुए देश के विकास लक्ष्य से जोड़ा, जबकि विपक्ष ने इसे मनरेगा को कमजोर करने वाला कदम करार दिया। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बहस के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम शुरुआत में महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले यह सिर्फ नरेगा था। 2009 के चुनाव आए, तब वोट और राजनीति के कारण महात्मा गांधी को याद किया गया और बाद में उनके नाम को जोड़ा गया. शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार किसी नाम की नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के वास्तविक रोजगार और आजीविका की गारंटी की बात कर रही है।
मनरेगा से कितना अलग है VB–G Ram G Bill?
- सरकार के मुताबिक नया कानून पुराने मनरेगा से कई मायनों में अलग है.
- रोजगार की गारंटी: अब 100 दिनों की जगह 125 दिन रोजगार देने का प्रावधान किया गया है।
- खर्च का बंटवारा: पहले पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, अब राज्यों को भी 10 से 40 प्रतिशत तक हिस्सेदारी करनी होगी।
- कृषि कार्यों में बदलाव: बुवाई और कटाई के करीब 60 दिनों के दौरान रोजगार नहीं दिया जाएगा, ताकि खेतों में मजदूरों की कमी न हो और कृषि कार्य प्रभावित न हों।