Bihar Rajya Sabha Elections 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. भले ही चुनाव अभी करीब तीन महीने दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों के भीतर जोड़-तोड़ और रणनीति (Bihar politics ) बनाने का दौर तेज हो चुका है. विधानसभा में मौजूदा संख्याबल को देखते हुए इस बार का राज्यसभा चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है.
NDA में किसका पलड़ा भारी है
सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है, वह है दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पत्नी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की संभावित उम्मीदवार रीना पासवान. बताया जा रहा है कि एनडीए खेमे में उन्हें राज्यसभा भेजने पर गंभीर मंथन चल रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह चिराग पासवान के नेतृत्व वाली LJP(R) के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. मौजूदा राजनीतिक हालात और विधानसभा में उनकी पार्टी की सीमित ताकत को देखते हुए उनका एक बार फिर राज्यसभा पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार उन्हें रिपीट करना लगभग नामुमकिन हो सकता है. इसी बीच बीजेपी के भीतर भी समीकरण साफ होते दिख रहे हैं. हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है. पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और संगठन में बढ़ती जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें उच्च सदन भेजे जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है.
9 अप्रैल 2026 को खाली होंगी 5 सीटें
बिहार से राज्यसभा की कुल पांच सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं. जिन नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें राजद के प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह, जदयू के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. इन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए इस बार एक प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी. दरअसल, राज्यसभा चुनाव का गणित यह है कि जितनी सीटों पर चुनाव होना है, उसमें एक जोड़कर विधानसभा की कुल सीटों से भाग दिया जाता है. बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों को यदि 6 से भाग दिया जाए तो आंकड़ा 40.5 आता है, यानी जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा.
संख्याबल में पिछड़ रही राजद
विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के लिहाज से देखें तो राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए इस बार अपने एक भी नेता को राज्यसभा भेजना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. राजद के पास फिलहाल इतने विधायक नहीं हैं कि वह 41 का आंकड़ा अपने दम पर पार कर सके. जदयू की स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत है. पार्टी के पास 85 विधायक हैं, ऐसे में जदयू अपनी दोनों मौजूदा राज्यसभा सीटें बचाने में सफल रह सकती है. वहीं बीजेपी के पास 89 विधायक हैं, जो उसे कम से कम दो सीटों पर अपने प्रत्याशी जिताने की मजबूत स्थिति में खड़ा करता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद की दो सीटों पर भी बीजेपी उम्मीदवार उतारकर जीत दर्ज कर सकती है. कुल मिलाकर, बिहार का राज्यसभा चुनाव इस बार सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि सियासी ताकत और भविष्य की रणनीति का भी बड़ा इम्तिहान साबित होने जा रहा है. आने वाले दिनों में नामों की तस्वीर और ज्यादा साफ होगी, लेकिन अभी से शुरू हुआ यह सियासी गुणा-गणित आने वाले चुनावी संग्राम की झलक जरूर दे रहा है.