नितिन नबीन का टिकट कंफर्म…पवन सिंह को भी मिलेगा इनाम ! राज्यसभा की पांचवीं सीट पर NDA में उलझा गणित

Bihar politics : बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 (Rajya Sabha)से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो भाजपा कोटे से एक सीट पर बदलाव लगभग तय माना जा रहा है. पटना के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नबीन का राज्य की राजनीति से बाहर जाना अब लगभग तय माना जा रहा है. नितिन नबीन को हाल ही में भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. इस पद पर नियुक्ति के ठीक दो दिन बाद उन्होंने बिहार कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया, जिसने उनके भविष्य की राजनीति को लेकर अटकलों को और मजबूत कर दिया है.

केंद्र की राजनीति में लॉन्च की तैयारी

भाजपा सूत्रों के मुताबिक नितिन नबीन जल्द ही विधायक पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं. पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के इतने बड़े पद पर रहते हुए किसी नेता का केवल विधायक होना उसके कद के अनुरूप नहीं है. एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया कि पार्टी की परंपरा रही है कि लोकसभा या राज्यसभा सांसद ही राष्ट्रीय पदों पर रहते हैं. ऐसे में नितिन नबीन को पहले राज्यसभा भेजकर केंद्र की राजनीति में स्थापित किया जाएगा और फिर आगे लोकसभा चुनाव की तैयारी कराई जाएगी. भाजपा पहले भी कई नेताओं के साथ यही रणनीति अपना चुकी है.

पवन सिंह को मिल सकता है बड़ा इनाम?

इसी बीच भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और भाजपा नेता पवन सिंह को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पवन सिंह और भाजपा के रिश्तों में खटास आ गई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव 2025 से पहले उन्होंने पार्टी जॉइन की और पूरे दमखम के साथ प्रचार किया. पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा पवन सिंह को किसी बड़े राजनीतिक पद या जिम्मेदारी से नवाज सकती है. हालांकि पार्टी के नेता इस सवाल को अभी जल्दबाजी बता रहे हैं. बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सांसद मनोज तिवारी का एक बयान इस वहस को और हवा दे रही है. तिवारी ने कहा था कि पवन सिंह के लिए सबकुछ तय है. हालांकि, अब तक न तो भाजपा और न ही पवन सिंह की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है.

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जदयू की दो सीटों पर संशय

इधर जदयू के जिन दो नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें हरिवंश नारायण सिंह (राज्यसभा के उपसभापति) और रामनाथ ठाकुर (केंद्रीय मंत्री) शामिल हैं. दोनों नीतीश कुमार के बेहद करीबी और पार्टी के वरिष्ठ चेहरे हैं. जदयू इन्हें पहले ही दो-दो बार राज्यसभा भेज चुकी है. हालांकि नीतीश कुमार आमतौर पर किसी नेता को दो से ज्यादा बार राज्यसभा नहीं भेजते, लेकिन इन दोनों के कद और अहमियत को देखते हुए रिपीट होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

पांचवीं सीट पर फंसा पेंच

असल उलझन पांचवीं राज्यसभा सीट को लेकर है. यह सीट फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा के पास है, लेकिन उनके पास सिर्फ 4 विधायक हैं. भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने के मूड में नहीं है. एनडीए में भाजपा और जदयू के बाद सबसे ज्यादा विधायक 19 LJP (रामविलास) के पास हैं . लेकिन राज्यसभा जीत के लिए उन्हें अभी भी 22 विधायकों का समर्थन चाहिए. चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के बाद एनडीए के पास कुल 38 विधायक बचते हैं, जबकि जरूरी संख्या से यह 3 विधायक कम है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग के बिना जीत मुश्किल मानी जा रही है.

चिराग पासवान की असली परीक्षा

ऐसे हालात में चिराग पासवान की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. विधानसभा चुनाव के दौरान ही खबरें आई थीं कि चिराग अपनी मां रीना पासवान के लिए राज्यसभा सीट की मांग कर रहे हैं. यह दावा अब भी बना हुआ है. अगर एनडीए उन्हें पांचवीं सीट ऑफर करता है, तो चिराग को न सिर्फ एनडीए सहयोगियों को मनाना होगा, बल्कि विपक्ष से भी कम से कम तीन विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ेगा.

उपेंद्र कुशवाहा का भविष्य लगभग तय

लोकसभा चुनाव 2024 के समय भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा से लोकसभा और विधान परिषद की एक-एक सीट का वादा किया था. वे काराकाट से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. इसके पीछे पवन सिंह फैक्टर को बड़ी वजह माना गया. डैमेज कंट्रोल के तहत उन्हें विधान परिषद भेजने की कोशिश हुई, लेकिन जदयू राजी नहीं हुई. आखिरकार 2 जुलाई 2024 को भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजने का ऐलान किया. अब हालात बदल चुके हैं. विधानसभा चुनाव के बाद कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनाकर राजनीति में लॉन्च कर दिया है. माना जा रहा है कि अप्रैल के बाद वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहेंगे. इधर राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा अब कुशवाहा को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है. पत्नी विधायक, बेटा मंत्री और खुद राज्यसभा सांसद इन तीनों को साथ रखने से पार्टी पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग सकता है. इसी वजह से भाजपा अब नए चेहरों और नए समीकरणों पर दांव लगाने की तैयारी में है.

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