Bihar politics : हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा (से) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने बिहार से राज्यसभा की एक सीट पर अपनी दावेदारी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है. उनके हालिया बयान और पार्टी के भीतर दिए गए निर्देशों ने एनडीए गठबंधन की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है. मीडिया सूत्रों के मुताबिक, जीतनराम मांझी ने अपने पुत्र और बिहार सरकार में मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन से नाराजगी भरे लहजे में कहा है कि अगर राज्यसभा की सीट नहीं मिलती है तो मंत्री पद का त्याग कर देना चाहिए. मांझी ने साफ शब्दों में अपने बेटे से कहा कि तू छोड़ दा मंत्री पद का मोह. इस बयान के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे राज्यसभा सीट पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
BJP मंत्री दिलीप जायसवाल की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर जब बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने जीतनराम मांझी को एनडीए का मजबूत और सम्मानित सहयोगी बताया. जायसवाल ने कहा कि जीतनराम मांझी जी मीडिया को थोड़ा मिर्च-मसाला मिल गया है, इसके अलावा उनके दिल में कुछ और नहीं है. वह हमेशा एनडीए के प्रति समर्पित रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मांझी ने दिन-रात मेहनत की और गठबंधन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. जायसवाल ने स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने जो भी कहा है, वह एनडीए को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि और मजबूत करने के उद्देश्य से कहा है.
उधर राज्यसभा टिकट की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप जायसवाल ने इसे पूरी तरह जायज बताया. उन्होंने कहा कि जब भी टिकट बंटवारे का समय आता है, तो हर दल और नेता अपनी बात रखता है. पहले भी मांझी जी ने अपनी बात रखने के लिए दोहा और कविता का सहारा लिया है. उन्होंने कहा कि अपने हित की बात करना स्वाभाविक है, इसे विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, जब सांसदों और विधायकों द्वारा कमीशन वसूली के आरोपों को लेकर सवाल पूछा गया, तो इस पर दिलीप जायसवाल ने टिप्पणी करने से बचते हुए चुप्पी साध ली. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव हो सकता है. जब उनसे मुलाकात होगी, तो पूछूंगा कि इसके पीछे क्या वजह है. इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जीतनराम मांझी का यह बयान एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. एक ओर वह अपने पुत्र को मंत्री पद छोड़ने की सलाह देकर दबाव की राजनीति कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए के प्रति अपनी वफादारी भी लगातार दोहरा रहे हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एनडीए के भीतर घटक दलों के बीच संतुलन, हिस्सेदारी और भविष्य की रणनीति को भी उजागर करता है. साथ ही, इसमें परिवार और राजनीति के मेल की झलक भी साफ दिखाई देती है. अब सबकी निगाहें राज्यसभा सीट को लेकर होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जीतनराम मांझी की दावेदारी एनडीए में स्वीकार होती है या नहीं. वहीं, डॉ. संतोष कुमार सुमन मंत्री पद को लेकर क्या रुख अपनाते हैं, यह भी बिहार की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकता है.