Bihar news : बिहार बीजेपी के कोषाध्यक्ष और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के पूर्व अध्यक्ष राकेश तिवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पटना पुलिस ने उनके खिलाफ फर्जीवाड़ा, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर कोर्ट के आदेश के बाद पाटलिपुत्रा थाना में दर्ज की गई है. राकेश तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष की मौत के बाद उनके फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक खाते से करीब 30 लाख रुपये की अवैध निकासी और ट्रांसफर करवाई. मामला वर्ष 2024 का बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने पहले केस दर्ज करने से इंकार कर दिया था. इसके बाद शिकायतकर्ता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पाटलिपुत्रा थाना में दर्ज एफआईआर में राकेश तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2), 336(3), 334, 335 और 338 लगाई गई हैं. इन धाराओं में गंभीर जालसाजी, फ्रॉड, आपराधिक विश्वासघात और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे अपराध शामिल हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. एफआईआर के अनुसार, बिहार क्रिकेट एसोसियेशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष आशुतोष नंदन सिंह का निधन 24 जून 2024 को हो गया था. एसोसिएशन के नियमों के मुताबिक बैंक खाते का संचालन अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता है. आरोप है कि आशुतोष नंदन सिंह के निधन के बाद राकेश तिवारी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर कर HDFC बैंक, बोरिंग रोड ब्रांच स्थित बिहार क्रिकेट एसोसियेशन के खाते (खाता संख्या 50200051955995) से लगभग 30 लाख रुपये की राशि विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाई और कुछ रकम नकद भी निकाली गई.
बीसीसीआई फंड और खिलाड़ियों से अवैध उगाही के आरोप
एफआईआर में यह भी कहा गया है कि राकेश तिवारी ने एसोसियेशन के अकाउंट डिपार्टमेंट और बैंक मैनेजर की कथित मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा किया. पहले सचिव की जगह खुद को खाते के संचालन में शामिल किया गया और फिर कोषाध्यक्ष की मृत्यु के बाद जाली हस्ताक्षरों के जरिए चेक और RTGS फॉर्म के माध्यम से राशि की निकासी की गई. शिकायतकर्ता ने एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि राकेश तिवारी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर बिहार क्रिकेट एसोसियेशन पर अवैध कब्जा कर लिया है. उन पर बीसीसीआई से मिलने वाले करोड़ों रुपये के फंड में घोटाले, बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों को बिहार से खिलाने और उनसे हर साल करोड़ों रुपये की अवैध वसूली करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. शिकायत में कहा गया है कि यह पूरे बिहार के क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ धोखा है.
पुलिस ने नहीं की थी कार्रवाई, कोर्ट जाना पड़ा
एफआईआर दर्ज कराने वाले कुमार आशुतोष का कहना है कि जब उन्हें इस मामले की जानकारी मिली तो वे सबसे पहले श्रीकृष्णापुरी थाना पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस ने केस दर्ज करने से मना कर दिया. इसके बाद उन्होंने 26 अक्टूबर 2024 को तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक सह डीआईजी को भी लिखित शिकायत दी, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. अंततः कुमार आशुतोष ने पटना कोर्ट का रुख किया. कोर्ट के कई बार निर्देश देने के बाद पाटलिपुत्रा थाना में राकेश तिवारी के साथ-साथ बिहार क्रिकेट एसोसियेशन के अकाउंटेंट मनीष कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.
राजनीतिक और खेल जगत में हलचल
राकेश तिवारी को लेकर यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे बिहार बीजेपी के कोषाध्यक्ष हैं और खुद को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी बताते रहे हैं. कुछ महीने पहले तक वे बिहार क्रिकेट एसोसियेशन के अध्यक्ष थे, उनके बाद उनके बेटे हर्ष वर्धन को अध्यक्ष बनाया गया. अब इस एफआईआर के बाद न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में बल्कि खेल जगत में भी हलचल तेज हो गई है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी.